सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर की प्रक्रिया को वैध ठहराया
The Supreme Court upheld the validity of the SIR process.
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट बुधवार को उन याचिकाओं के समूह पर फैसला सुना दिया, जिनमें भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की वैधता को चुनौती दी गई थी। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस पर फैसला सुनाते हुए एसआईआर की प्रक्रिया को वैध ठहराया है। न्यायालय ने यह तय कर दिया कि चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 326, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और उसके तहत बनाए गए नियमों के तहत वर्तमान स्वरूप में एसआईआर करने की शक्तियां प्राप्त हैं।
इस मामले में अधिकांश याचिकाएं जून 2025 में दायर की गई थीं, जब चुनाव आयोग ने बिहार में एसआईआर कराने का फैसला किया था। याचिकाकर्ताओं में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर), राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सांसद मनोज झा, कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) सांसद सुप्रिया सुले समेत कई लोग शामिल हैं।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल मामले में सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग को आधार कार्ड को एसआईआर के लिए अनिवार्य (12वें दस्तावेज के रूप में) दस्तावेज में शामिल करने का निर्देश दिया था। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि आधार नागरिक का प्रमाण नहीं होगा और चुनाव आयोग के आधार कार्ड का सत्यापन करा सकेगा।






