सरकार ने व्यवस्था बनाने की कोशिश की है
The government has tried to make arrangements
मानसून सत्र के पहले दिन राज्य में खाद की कमी व राजस्व निरीक्षक की भर्ती में गड़बड़ी को लेकर जोरदार हंगामा विपक्ष ने किया। यह तो होना ही था, विधानसभा में विपक्ष को मौका मिलता है सरकार को घेरने और जवाब देने के लिए मजबूर करने का। विधानसभा में विपक्ष को मिलता है सरकार की कमी-खामी बताने का मौका।यह बताने का मौका कि जनता क्या चाहती है और सरकार उसे पूरा नहीं कर पा रही है।विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि पूरे राज्य में खाद की कमी है।किसानों को मनपसंद खाद न मिलने से वह परेशान है और नाराज भी हैं।सरकार को इस मामले में विधानसभा में चर्चा करानी चाहिए।पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि किसानों को १३०० रुपए डीेएपी २१०० मे खरीदनी पड़ रही है। राज्य सरकार धान का उत्पादन कम करने के लिए खाद की सप्लाई रोक रही है।
नेता प्रतिपक्ष महंत व पूर्व सीएम भूपेश बघेल सही कह रहे हैं कि राज्य के किसान डीएपी की कमी से परेशान है, वह इस कमी की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए आए दिन धरना प्रदर्शन, चक्का जाम कर रहे हैं।राज्य में डीेएपी की कमी है इसी वजह से सरकार सभी किसानों को डीएपी उपलब्ध नहीं करा पा रही है।वह जानती थी कि राज्य में खेती के समय डीएपी की कमी हो सकती है इसलिए उसने वैकल्पिक खाद की व्यवस्था की थी। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने विधानसभा में बताया कि फास्फेटिक खाद की आपूर्ति प्रभावित हुई है,इसलिए हमने बहुत पहले से वैकल्पिक खाद की व्यवस्था की है। किसानों को भी वैकल्पिक खाद के उपयोग की जानकारी दी जा रही है, उनको वैकल्पिक खाद का उपयोग करने प्रेरित किया जा रहा है। सीएम साय ने भी कहा है कि राज्य में नैनो डीएपी,एऩपीके पर्याप्त है, वैकल्पिक खाद की कोई कमी नहीं है।
आंकड़ों के मुताबिक राज्य में रासायनिक उर्वरकों की कोई कमी नहीं है।खरीफ सीजन२०२५ के लिए सभी प्रकार का रासायनिक खाद सभी सहकारी समितियों व निजी विक्रय केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।वैश्विक परिस्थिति के चलते डीेएपी खाद की आयात में कमी को देखते हुए इसके विकल्प के रूप में सरकार ने अऩ्य रासायनिक उरर्वकों की भरपूर आपूर्ति,वितरण सुनिश्चित की है। डीेएपी की कमी को देखते हुए सरकार ने इसके विकल्प के रूप में १७८००० बाटल नैनो डीएपी,एनपीके उरर्वक का लक्ष्य से पचीस हजार मेट्रिक टन अधिक तथा एसएसपी का तय लक्ष्य से पचास हजार मेट्रिक टन का अतिरिक्त भंडारण किया गया है।पाेटाश के निर्धारित लक्ष्य का ६० हजार मेट्रिक टन से विरुध्द अब तक ७७ हजार मे.टन से अधिक म्यूरेट आफ पोटाश का भंडारण किया गया है।
ऐसा नहीं ही किसानों के लिए सरकार ने कुछ नहीं किया है, सरकार ने जो वैकल्पिक व्यवस्था हो सकती थी, वह व्यवस्था की है। यह और बात है कि किसानों को डीएपी की आदत है, इसलिए वह सरकार से डीएपी मांग रहे हैं,डीएपी की कमी है इसलिए सरकार चाहती है कि किसान वैकल्पिक खाद का उपयोग खेती के लिए करें। इसके लिए उनको जागरूक भी किया जा रहा है, बताया जा रहा है कि डीएपी नही मिल रहा है तो वह नैनों डीएपी का उपयोग कर सकते हैं।जहां तक भूपेश बघेल का सवाल है तो वह तो हमेशा कहते रहते हैं कि सरकार किसानों का पूरा धान नहीं खरीदना चाहती है,सरकार का धान का उत्पादन कम करना चाहती है, इसलिए वह किसानों को डीएपी उपलब्ध नहीं करा रही है।
वह खुद को राज्य का सबसे बड़ा नेता समझते हैं, सबसे बड़ा किसान हितैषी नेता समझते हैं इसलिए जब भी किसान हित की बात आती है तो वह सरकार को किसान विरोधी बताने का प्रयास करते हैं। हकीकत यह है कि चुनाव हारने के बाद भूपेश बघेल का राजनीतिक कद कुछ तो कम हुआ है, पंजाब में पार्टी को चुनाव भी तो वह नहीं जिता पाए हैं, इसलिए वह राज्य में अपने को बड़ा नेता साबित करने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं, वह बताने का प्रयास करते हैं कि राज्य के सबसे बड़े कांग्रेस नेता तो वही हैं। यही वजह है कि वह बैठक में दूसरे नेताओं के बारे में शिकायत करने से नहीं चूकते हैं। वह प्रदेश प्रभारी को भी यही बताने का प्रयास करते हैं कि जैसा वह काम करते हैं, दूसरे कांग्रेस नेता नहीं करते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे बोलकर जरूर गए हैं कि सब बड़े नेताओं को एकजुट होकर काम करना है लेकिन यह एकजुटता दिखती नहीं है, कई कार्यक्रमों में दिख जाता है कि कांग्रेस एकजुट नहीं है।






