रायपुर : संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने दीपावली पर्व के यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होने पर प्रदेश एवं देशवासियों को दी बधाई एवं शुभकामनाएं
Raipur: Culture Minister Shri Rajesh Agrawal congratulated and wished the people of the state and the country on the inclusion of Diwali festival in the UNESCO Intangible Cultural Heritage List.
यह सम्मान हमारी सनातन परंपरा, श्रीराम के आदर्शों और छत्तीसगढ़ की विशिष्ट ‘भांचा’ संस्कृति की वैश्विक पहचान है: श्री अग्रवाल
रायपुर, 11 दिसंबर 2025

खुशियों और प्रकाश का पर्व दीपावली अब विश्व स्तर पर भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुका है। यूनेस्को की इंटरगवर्नमेंटल कमेटी ने नई दिल्ली स्थित लाल किला परिसर में चल रही बैठक के दौरान ‘दीपावली, द फेस्टिवल ऑफ लाइट्स’ को प्रतिनिधि सूची में शामिल करने का निर्णय लिया, जिससे यह भारत की 16वीं अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर बन गई है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने प्रदेशवासियों और देशवासियों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं प्रेषित की है। उन्होंने कहा कि अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देने वाली दीपावली को वैश्विक मान्यता मिलना भारत की आध्यात्मिक परंपरा, सांस्कृतिक विविधता और साझा उत्सवधर्मिता की स्वीकृति है।
संस्कृति मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि प्रभु श्रीराम के वनवास का बड़ा हिस्सा आज के छत्तीसगढ़ क्षेत्र के घने वनों और आश्रमों में व्यतीत हुआ, जिससे यह धरती स्वयं श्रीराम की पावन चरण-पथ से अभिमंडित है। ऐतिहासिक और पौराणिक संदर्भों में छत्तीसगढ़ को प्रभु श्री राम का ननिहाल माना जाता है, क्योंकि माता कौशल्या की जन्मस्थली मानी जाने वाली चंदखुरी में उनका प्राचीन मंदिर स्थित है, जो श्री राम-कौशल्या संबंध का सजीव प्रतीक स्थल है।
उन्होंने कहा कि इसी भावनात्मक रिश्ते के कारण छत्तीसगढ़ की जनता प्रभु श्रीराम को स्नेहपूर्वक ‘भांचा राम’ कहकर संबोधित करती है। भांचा के प्रति विशेष सम्मान की अभिव्यक्ति के रूप में यहां चरण स्पर्श करने की लोकपरंपरा प्रचलित है, जो छत्तीसगढ़ी समाज में श्रीराम के प्रति अपनत्व, भक्ति और पारिवारिक निकटता की अनूठी मिसाल प्रस्तुत करती है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि दीपावली का यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होना छत्तीसगढ़ के लिए भी गर्व का क्षण है, क्योंकि यह वही त्योहार है जो श्रीराम के अयोध्या लौटने की स्मृति में गांव-गांव में लोकोत्सव और पारिवारिक परंपराओं के रूप में यहां विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह मान्यता दीपावली को केवल धार्मिक पर्व न मानकर एक सांस्कृतिक, सामाजिक समरसता, पारिवारिक मिलन, लोककला, दीप सज्जा, रंगोली, गीत-संगीत और पारंपरिक हस्तशिल्प के व्यापक उत्सव के रूप में स्वीकार करती है।
उन्होंने रेखांकित किया कि सूची में शामिल होने के बाद भारत और छत्तीसगढ़ की साझा जिम्मेदारी है कि दीपावली से जुड़ी लोकपरंपराओं, शिल्पकला, पर्यावरण-संवेदनशील आचरण और सामूहिक उत्सव संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित और सशक्त रूप से पहुँचाया जाए।
संस्कृति मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-संस्कृति, त्यौहारों, नृत्यों, गीतों और आस्थाओं की जड़ें गहराई से रामकथा और ग्रामीण जीवन से जुड़ी हैं। दीपावली को मिली वैश्विक मान्यता इस बात की प्रतीक है कि गाँव की चौपाल से लेकर शहरों की सड़कों तक जलने वाला हर दीया अब विश्व विरासत के आलोक में जगमगा रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के प्रत्येक घरों में सायंकाल दिए जलाकर इस अवसर को उत्सव के रूप में मनाने का आह्वान किया।
श्री अग्रवाल ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र सद्भाव, सेवा, साझा आनंद और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि श्रीराम के आदर्शों, माता कौशल्या की करुणा और ‘भांचा राम’ के प्रति छत्तीसगढ़ की आत्मीय श्रद्धा से प्रेरित होकर प्रदेश सामाजिक व आध्यात्मिक प्रगति के नए आयाम स्थापित करेगा।
श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह वर्ष हर घर में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और नई ऊर्जा लेकर आए। उन्होंने कामना की कि यूनेस्को की यह मान्यता भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को नया आयाम दे, विश्व समुदाय में भारतीय त्योहारों के प्रति जिज्ञासा और सम्मान बढ़ाए, तथा छत्तीसगढ़ को श्रीराम के वनगमन पथ और कौशल्या धाम के रूप में देखने आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में सकारात्मक वृद्धि हो।
उन्होंने अंत में सभी छत्तीसगढ़ वासियों, भारतीयों और प्रवासी भारतीय समुदाय को दीपावली पर्व के यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होने पर हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए इसे “विश्व को भारत के सांस्कृतिक प्रकाश से आलोकित करने वाला पर्व” बताया।






