युक्तियुक्तकरण पर बवाल: बिना सुनवाई शिक्षकों की पोस्टिंग पर आपत्ति
Ruckus over rationalization: Objection to posting of teachers without hearing
रायपुर। छत्तीसगढ़ में युक्तियुक्तकरण नीति को लेकर शिक्षक संगठनों में असंतोष गहराता जा रहा है। शिक्षक साझा मंच छत्तीसगढ़ के प्रदेश संचालक संजय शर्मा ने युक्तियुक्तकरण की वर्तमान प्रक्रिया को एकतरफा और त्रुटिपूर्ण करार देते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज की है। उनका कहना है कि प्रदेश के प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक शालाओं में बिना समुचित प्रक्रिया अपनाए एक-एक पद कम किए जा रहे हैं और शिक्षकों को अतिशेष घोषित कर स्थानांतरित करने की तैयारी चल रही है।
"बिना सुनवाई, सीधे ट्रांसफर की तैयारी" – संजय शर्मा
संजय शर्मा ने कहा कि यह प्रक्रिया सीधी भर्ती या पदोन्नति की नहीं, बल्कि वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों के सेवा स्थलों को प्रभावित करने वाली नीति है। इसमें न तो दावा-आपत्ति दर्ज करने का कोई अवसर दिया गया है, न ही संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी या अन्य जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा शिक्षकों की बात सुनी जा रही है।
"दावा-आपत्ति का अधिकार देना जरूरी"
उन्होंने स्पष्ट किया कि युक्तियुक्तकरण के चलते जो शिक्षक अतिशेष घोषित किए जा रहे हैं, उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट करने और त्रुटियों को ठीक करवाने का अवसर मिलना चाहिए। कई मामलों में जानकारी गलत होने के कारण शिक्षक अनावश्यक रूप से प्रभावित हो रहे हैं।
"शिक्षक का पक्ष सही होने पर वह अतिशेष घोषित होने से बच सकता है," संजय शर्मा ने कहा। उन्होंने मांग की है कि शिक्षा विभाग द्वारा जारी कैलेंडर में संशोधन कर एक सप्ताह का दावा-आपत्ति अवधि प्रदान की जाए।
कैलेंडर पर सवाल, तत्काल संशोधन की मांग
शिक्षक साझा मंच के अनुसार, शिक्षा विभाग द्वारा 28 मई को अतिशेष शिक्षकों की सूची का परीक्षण और 4 जून को सीधी पोस्टिंग का जो कार्यक्रम घोषित किया गया है, वह प्रक्रिया की पारदर्शिता और न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
शिक्षकों में रोष, विभाग से स्पष्टता की अपेक्षा
शिक्षक संगठनों का कहना है कि वर्षों से एक ही शाला में सेवा दे रहे शिक्षकों को अचानक अतिशेष घोषित कर देना और बिना सुनवाई सीधे अन्यत्र स्थानांतरित करना, न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षक मनोबल दोनों पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
शिक्षक साझा मंच ने शिक्षा विभाग से अपील की है कि युक्तियुक्तकरण नीति में पारदर्शिता लाते हुए शिक्षकों को न्याय दिलाने के लिए दावा-आपत्ति की स्पष्ट प्रक्रिया और समयसीमा तय की जाए। अन्यथा यह आंदोलन का रूप ले सकता है, जिसकी ज़िम्मेदारी विभागीय प्रशासन पर होगी।






