पत्रकार की हत्या,दोषी को सजा मिलनी चाहिए

Journalist murdered, culprit must be punished

पत्रकार की हत्या,दोषी को सजा मिलनी चाहिए

पत्रकार को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है।लोकतंत्र में उसकी भी अहम भूमिका होती है, वह क्षेत्र की कमी-खामी उजाकर करता है और देश समाज को एक दिशा देने का कार्य करता है।उसके कमी खामी को उजागर करने से ही देश व समाज कमी खामी को दूर करता है और इससे देश व समाज को जो नुकसान होना हाेता है, वह नहीं होता है। पत्रकार देश हित, राज्य हित व समाज हित में काम करता है। वह जहां कहीं भी भ्रष्टाचार होता है, उसे उजागर करता है, कहीं कोई काम ठीक से नहीं किया जा रहा है तो वह सरकार व सरकारी विभागों को बताता है कि यहां पर सही काम नहीं हो रहा है इससे सरकार व जनता को भविष्य में नुकसान होगा।

वह जानता है कि वह गलत काम करने वालों से पंगा ले रहा है, इससे उसका नुकसान हो सकता है, उस पर हमला हो सकता है, उसकी जान भी जा सकती है लेकिन वह डरता नहीं है, पत्रकार होने का धर्म निभाता है। बीजापुर के पत्रकार मुकेश चंद्राकर ने भी यही किया। उसने भी पत्रकार होने का धर्म निभाया।उसने ठेकेदार सुरेश चंद्राकर के खिलाफ खबर बनाई थी और चैनल में भेजा था। चैनल ने उसे प्रसारित किया था कि ठेकेदार सुरेश चंद्राकर जो मिरतुर से गंगालूर के बीच सड़क बनवा रहा है,सड़क अभी पूरी नहीं बनी है,लेकिन पीडब्लूडी के अफसरों ने ठेकेदार को बिना पूरी सड़क बने ९० फीसदी पैसों का भुगतान कर दिया है। यह तो नियम के खिलाफ काम की जानकारी मुकेश चंद्राकर ने एक तरह से सरकार व विभाग के उच्चाधिकारियों को दी। उसने कुछ गलत नहीं किया, उसने तो अपना काम किया। सही तरीके से किया।

 जिस ठेकेदार के खिलाफ उसने खबर दी थी, उस ठेकेदार को यह साबित करना था कि मुकेश चंद्राकर ने जो खबर भेजी है,वह गलत है तो कैसे गलत है, सही बात क्या है।ठेकेदार ने ऐसा कुछ नहीं किया। मुकेश के पास किसी को फोन आया था तो वह घर से निकला और उसके बाद वह लापता हो गया। पांच दिन बाद उसकी लाश मिली है तो ठेकेदार सुरेश चंद्राकर के बैडमिंटन कोर्ट के पास बने टैंक से।उसकी हत्या कर शव को टैंक में डाल दिया गया था और फिर से उसका मुंह बंद कर दिया गया था। पुलिस को टैंक का मुंह बंद करने ताजा प्लास्टर किए जाने पर शक हुआ उसने टैंक को खुलवाया तो उसमें मुकेश का शव मिला। जिसके सिर पर टंगिया व शरीर पर हथियार के कई निशान हैं।

ठेकेदार के टैंक में पत्रकार मुकेश चंद्राकर का शव मिलने से माना जा रहा है कि उसी ने खबर प्रकाशित करने के कारण मरवा दिया होगा। होता यही है कि जिसके खिलाफ खबर प्रकाशित की जाती है, उसे पहले तो कई तरह के हथकंड अपना कर चुप कराने का प्रयास किया जाता है, लेकिन बहुत कम ऐसा होता है कि कोई पत्रकार की हत्या करवा दे। बीजापुर में ऐसा हुआ है। मुकेश चंद्राकर की हत्या के विरोध में पत्रकारों ने शनिवार को बीजापुर बद का आव्हान किया तथा चक्का जाम भी किया।पत्रकारों ने सरकार से मांग की है कि सुरेश चंद्राकर की संपत्ति जब्त कर सरकारी संपत्ति घोषित करे, मुकेश की हत्या में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।ठेकेदार सुरेश चंद्राकर की सुरक्षा मे लगे जवानों को हटाया जाए,उसके सभी टेंडर रद्द किए जाएं,उसके अवैध बाड़े ध्वस्त किया जाए।

कांग्रेस दीपक बैज ने मुकेश चंद्राकर की हत्या पर सरकार की तीखी आलोचना करते हुए कहा है कि साय के राज्य में पत्रकार भी सुरक्षित नहीं है। आम लोग तो आए दिन हत्या होने से खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं, वहीं अब पत्रकार की हत्या होने से पत्रकार भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि इस घटना के अपराधी को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा,उसे जल्द से जल्द पकड़कर कड़ी से कड़ी दिलाई जाएगी। अपराध चाहे आम आदमी के खिलाफ हो या पत्रकार के खिलाफ जब तक अपराधी को कडी़ सजा नहीं मिलती है, उनके हौसले कम नहीं होते हैं। वह बेखौफ अपराध करते रहते हैं। अपराधी के खिलाफ त्वरित पुलिस कार्रवाई तो होनी ही चाहिए, उसे सजा भी जरूर मिले सरकार को ऐसी जांच करानी चाहिए।