समर्थन मूल्य की गारंटी से बदली किसानों की तक़दीर

Guaranteed support price changed the fate of farmers

समर्थन मूल्य की गारंटी से बदली किसानों की तक़दीर

दो दिन में भुगतान, पारदर्शी व्यवस्था ने धान खरीदी को बनाया किसान उत्सव

रायपुर, 15 जनवरी 2026

 समर्थन मूल्य की गारंटी से बदली किसानों की तक़दीर

छत्तीसगढ़ शासन की सुव्यवस्थित धान खरीदी नीति किसानों के जीवन में खुशहाली और आर्थिक मजबूती का आधार बन रही है। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी, ऑनलाइन टोकन व्यवस्था, गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच और दो दिनों के भीतर भुगतान ने किसानों का भरोसा और उत्साह दोनों बढ़ाया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में जिले के सभी 17 धान उपार्जन केंद्रों में खरीदी कार्य पूरी पारदर्शिता और सुचारु ढंग से संचालित हो रहा है, जिसे किसान आज एक उत्सव के रूप में अनुभव कर रहे हैं।
     नारायणपुर विकासखंड के ग्राम बिंजली निवासी किसान श्री श्यामसिंह दुग्गा ने बताया कि उन्होंने अपनी 3 एकड़ भूमि में उत्पादित 30 क्विंटल धान का विक्रय समर्थन मूल्य पर किया। ऑनलाइन टोकन के माध्यम से निर्धारित तिथि पर धान विक्रय करने के बाद मात्र दो दिनों में राशि सीधे उनके बैंक खाते में जमा हो गई। उन्होंने बताया कि खरीदी केंद्र में पीने के पानी, बारदाने और मॉइश्चर मशीन जैसी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध थीं, जिससे किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई।
     समय पर भुगतान से उत्साहित श्री दुग्गा ने कहा कि अब वे आगामी फसल के लिए उन्नत बीज, खाद और आधुनिक कृषि कार्यों में निवेश कर पा रहे हैं, जिससे उत्पादन और आमदनी दोनों में लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने प्रभावी धान खरीदी व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।
     इसी तरह ग्राम पालकी के किसान श्री मेहता उसेण्डी ने अपनी 3 एकड़ भूमि से 50 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया। उन्होंने भी ऑनलाइन टोकन व्यवस्था की सराहना करते हुए बताया कि धान विक्रय के दो दिनों के भीतर भुगतान मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति और मजबूत हुई है। उन्होंने किसान हितैषी नीतियों के लिए शासन और जिला प्रशासन को धन्यवाद दिया।
     मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जिला प्रशासन द्वारा धान उपार्जन केंद्रों में सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं, ताकि किसानों को सरल, सुरक्षित और संतोषजनक वातावरण में अपनी उपज का उचित मूल्य मिल सके। यह व्यवस्था न केवल किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे रही है।