बिन मौसम बारिश

unseasonal rain

बिन मौसम बारिश

कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल, रायपुर छ.ग.

धरा पर जल धारा..

        जीवन सहारा .......

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आँगन में बूँद प्यारी,

      लगती है बड़ी न्यारी,

  छम-छम छम नाचे,

     * बड़ा मन भाती है।*

विचित्र-विचित्र लीला,

         प्रकृति है दिखलाती,

ऋतु बिन बरसात,

कलियाँ खिलाती है।

अनजानी राहों पर,

     प्रियतम साथ हो तो,

‘सुषमा’ सजाए स्वप्न,

नवगीत गाती है।

धरा पर जल धारा,

     जीवन सहारा बन,

मन के झंकृत तार,

छेड़-छेड़ जाती है।