रायपुर : बीजापुर में विकास की दस्तकः धुर माओवाद प्रभावित क्षेत्र के सात गांवों में पहली बार लगा मेगा हेल्थ कैंप
Raipur: Development knocks at the door of Bijapur: Mega health camps organised for the first time in seven villages of the highly Maoist-affected area.
989 ग्रामीणों को मिला उपचार का लाभ
रायपुर, 05 नवंबर 2025

कभी माओवाद की छाया में सिमटे बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक के इन्द्रावती नदी पार बसे गांवों में अब विकास की नई सुबह दिखने लगी है। छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति 2025 के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर नजर आने लगे हैं। बड़ी संख्या में माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद अब इन दुर्गम इलाकों में प्रशासन ने पहली बार सात गांवों में एक साथ मेगा हेल्थ कैंप का आयोजन किया, जिसने ग्रामीणों के जीवन में उम्मीद की नई किरण जगा दी।
इस अभियान में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम शामिल रही। टीम ने उसपरी, बेलनार, सतवा, कोसलनार, ताड़पोट, उतला और इतामपार गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाए। कुल 989 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। कैंप में सामान्य जांच के 777, रक्तचाप 371, मुख कैंसर 344, ब्रेस्ट कैंसर 112, नेत्र जांच 199, दंत जांच 154, टीकाकरण 14, संपूर्ण टीकाकरण 8, मलेरिया 156, क्षय रोग 7 तथा उल्टी-दस्त के 24 प्रकरणों की जांच की गई। इनमें 54 वरिष्ठ नागरिक भी शामिल रहे।
विशेषज्ञों ने एक बालक को हृदय रोग से ग्रस्त पाया, जिसे ‘चिरायु योजना’ के तहत उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी। कैंप के दौरान बीमार ग्रामीणों का मौके पर ही उपचार कर मुफ्त दवाइयों का वितरण किया गया। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुरूप साहू और डॉ. बी.एस. साहू ने बताया कि अब दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ हो रही हैं, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है। ग्रामीणों में भी अब भय की जगह विश्वास और आशा का माहौल दिखाई दे रहा है। वे शासन-प्रशासन से जुड़कर शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के प्रति सजग हो रहे हैं।
बीजापुर कलेक्टर श्री संबित मिश्रा ने स्वास्थ्य विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा “शासन के निर्देशानुसार प्रशासन अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के लिए संकल्पित है। ‘नियद नेल्लानार योजना’ के तहत अंदरुनी क्षेत्रों में विकास कार्यों में तेजी आई है और प्रशासन की टीमें पूरी तत्परता से काम कर रही हैं।”जिससे बीजापुर में अब सकारात्मक बदलाव नजर आ रहे है।
बीजापुर में यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है, बल्कि यह संदेश भी दे रही है कि अब माओवाद नहीं, मुख्यधारा और विकास ही बीजापुर की नई पहचान बनेगा।






