नए साल पर अंग्रेजी कैलेंडर से ज्यादा बिकते हैं पंचांग… गूगल भी नहीं डाल पाया असर

On New Year, Panchangs are sold more than English calendars… even Google could not make an impact

नए साल पर अंग्रेजी कैलेंडर से ज्यादा बिकते हैं पंचांग… गूगल भी नहीं डाल पाया असर

ग्वालियर: एक जनवरी से नया साल शुरू हो जाता है। यह नया साल अंग्रेजी साल का होता है, लेकिन नए साल पर अंग्रेजी कैलेंडर नहीं, बल्कि पंचांग कैलेंडर अधिक बिकते हैं।

हिंदू वर्ष के हिसाब से तिथियाें सहित तीज त्योहार की जानकारी सटीक रूप से मिलती है। साथ ही पंचांग कैलेंडर घर में कई कामों में आता है। इसलिए पंचांग कैलेंडर की बिक्री पर असर न तो कंप्यूटर-मोबाइल युग डाला पाया है और न ही इंटरनेट।

खास बात यह है कि आज कंप्यूटर, मोबाइल और इंटरनेट मीडिया के युग में भी पंचांग कैलेंडर की बिक्री पर कोई असर नहीं है। देश में तकरीबन हर सनातनी के घर में पंचांग कैलेंडर मिलता है। साथ ही बड़े धार्मिक आयोजनों की भी जानकारी रहती है।

चूंकि वर्तमान में लोग हिंदू नव वर्ष के महीनों को जानने व तिथियों के बारे में याद कम रख पाते है। जैसे महीने में एकादशी व्रत कब का है, महा अष्टमी का व्रत कब रखना है। ये सभी जानकारी इस कैलेंडर में मिल जाती हैं।

तीज त्योहार देखना हो, तो पंचांग कैलेंडर ही देखते हैं

ग्वालियर के विक्टोरिया मार्केट में पंचांग कैलेंडर बेचने वाले कारोबारी दीपक सिंघल ने बताया कि बेशक मोबाइल में गूगल पर सब कुछ दिख जाता है, लेकिन घरों में यदि तिथि, महीना या तीज त्योहार देखना हो तो लोग पंचांग कैलेंडर ही देखते हैं।

उन्होंने बताया कि बाजार में पंचांग कैलेंडर कई तरह के आते हैं। ये कैलेंडर क्षेत्र के हिसाब से अधिक लोकप्रिय हैं। ग्वालियर चंबल में सबसे अधिक लोकप्रिय पंचांग कैलेंडर जबलपुर का लाला रामस्वरूप है।

नीमच का निर्णय सागर व बनारस का ठाकुर प्रसाद का पंचांग कैलेंडर भी बाजार में उपलब्ध है। सिंघल के मुताबिक लाला रामस्वरूप का कैलेंडर 40 रुपए का है। इसी तरह अन्य कैलेंडर भी 40 से 50 रुपए के हैं।