भोपाल। अपना पाप छिपाने के लिए किसी ने एक नवजात बच्ची को मरने के लिए शाल में लपेटकर नजीराबाद के जंगल में फेंक दिया था। उन्हें उम्मीद थी कि जानवर उसे अपना निवाला बना लेंगे, लेकिन बचाने वाले के हाथ बहुत लंबे होते हैं। यह कहावत पूरी तरह चरितार्थ भी हुई। मासूम का करुण क्रंदन सुनकर 'इंद्र' ने उसे गोद में उठाया, तो 'कृष्णा' ने उसे अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों के मुताबिक बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है। इस मामले में पुलिस 24 घंटे में आसपास के 10 गांव की आंगनबाड़ियों का 15 दिन के अंदर जन्मे बच्चों का रिकॉर्ड खंगाल चुकी है। अभी तक इस नवजात की मां के बारे में कोई सुराग नहीं मिल सका है। बच्ची की उम्र एक-दो दिन बताई जा रही है।
वन चौकीदार ने सुनी रोने की आवाज
नजीराबाद थाना प्रभारी कृष्णा ठाकुर ने बताया कि इंदर सिंह गुर्जर वन विभाग में चौकीदार है। बुधवार सुबह नौ बजे वह भमोरा के जंगल में तालाब किनारे से गुजर रहा था, तभी उसने बच्चे के रोने की आवाज सुनाई थी। उसने देखा कि एक दो-तीन दिन की नवजात शाल में लिपटी पड़ी बिलख रही थी। फूल के समान सुंदर बच्ची को उसने गोद में उठाया और फोन से थाने में सूचना दी। वह एंबुलेंस के साथ मौके पर पहुंचे। नवजात को ऑक्सीजन देते हुए बैरसिया अस्पताल पहुंचाया। वहां चेक करने के बाद डॉक्टर ने उसे पूरी तरह स्वस्थ बताया। नवजात को बेहतर देखरेख के लिए भोपाल के कमला नेहरू अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है।
मुख्य मार्ग से 100 मीटर अंदर मिली बच्ची
नवजात की गर्भनाल पर अस्पताल का टैग नहीं लगा पाया गया है। इस आधार पर डॉक्टरों का अनुमान है कि प्रसव किसी घर में ही कराया गया है। पुलिस ने घटना स्थल के आसपास के 10 गांव की आंगनबाड़ियों का पिछले 15 में हुए बच्चों के जन्म संबंधी रिकॉर्ड खंगाल लिया है, लेकिन इस नवजात के बारे में जानकारी नहीं मिल सकी है। जहां बच्ची मिली है, वह स्थान बैरसिया-गुना मुख्य मार्ग से सिर्फ 100 मीटर अंदर है।
खतरों के बीच पड़ी थी मासूम
प्रसव के बाद नवजात को कहीं और से लाकर यहां फेंके जाने की आशंका भी जताई जा रही है। बच्ची को पूरी तरह स्वस्थ होने पर बाल कल्याण समिति के समक्ष ले जाया जाएगा। थाना प्रभारी कृष्णा ठाकुर के मुताबिक जिस स्थल से बालिका मिली है, उसके आसपास काफी जंगली जानवर हैं। यह सौभाग्य की बात है कि चौकीदार का वहां से गुजरना हुआ और मासूम के साथ अनहोनी टल गई।