सुनना ही हमारे सुधरने का द्वार : मनीष सागर

Listening is the only way to improve ourselves: Manish Sagar

सुनना ही हमारे सुधरने का द्वार : मनीष सागर

रायपुर। टैगोर नगर स्थित पटवा भवन में रविवार को विशेष प्रचवनमाला में युवा मनीषी मनीष सागर महाराज ने कहा कि अपने इगो को हटाना होगा। आप जब सुनना शुरू कर दोगे तभी सुधार होगा। सुनना ही हमारे सुधरने का द्वार है। कोई आपकी गलती बताएं तो उसे सुनकर उसका विश्लेषण करें और सुधार करें। ऐसा करने वाला व्यक्ति जीवन में आगे बढ़ सकता है। इगो एक पहाड़ के समान होता है इगो को ध्वस्त करना पड़ेगा। उम्र के साथ परिपक्वता बढ़े, गंभीरता बढ़े, पद बढ़े, प्रतिष्ठा बढ़े लेकिन इगो को घटाना होगा। जीवन में आप आगे बढ़ो लेकिन इगो को घटाते जाओ।

उपाध्याय भगवंत ने कहा कि व्यक्तित्व ऐसा बनाओ कि घर में हर छोटे और बड़े अपनी बात बगैर किसी घबराहट के आपसे खुलकर कह सकें। सुखी होने का फार्मूला यही है। कोई भी आपसे कहे तो आप सुन सको। घर वालों से पूछो कि मेरे को क्या सुधार करना चाहिए। यदि वे नहीं बोल सके तो बोलने लायक बनाना पड़ेगा। अपनी गलती को दिमाग में रखकर सुधारने का अभ्यास करें। हो सकता है फिर भी गलती होगी लेकिन आत्मविश्वास मजबूत रखें। आत्मविश्वास खोकर सुधार संभव नहीं है। 


उपाध्याय भगवंत ने कहा कि कोई भी इस संसार में पूर्ण नहीं है। यदि मेरी अपूर्णता किसी ने बताई है तो मानो यह अच्छी बात है और सामने वाले ने आपको वह ध्यान दिया है और इस पर सुधार का कार्य करें। सुनना बहुत जरूरी है। सही सुनना, सुधार की बात को सुनना, अपनी बात को सुनना ये भी बड़ी उपलब्धि है। किसी की गलती देखें तो तुरंत ना टोके। उचित समय,उचित स्थान को देखकर धैर्य पूर्वक समझाएं। अपमान करने की भावना से किसी की गलती ना बताएं।जीवन की पहली पाठशाला, समाज की सबसे छोटी इकाई और हमारी सबसे छोटी दुनिया परिवार है। इस पाठशाला की परीक्षा में हमें उत्तीर्ण होने का पुरुषार्थ करना है। आज सभी जीवन की पहली पाठशाला में फेल हो जाते हैं। इस कारण ही परिवार में कलह, क्लेश और अशांति होती है और परिवार बिखर जाते हैं।


उन्होंने कहा कि सबसे पहले खुद में सुधार की आवश्यकता है। सब सुधरेंगे तब मैं सुधारूंगा यह मानते रहेंगे तो कुछ नहीं होगा। सब व्यक्ति यह ठान लें कि अपनी जगह पर सही जीवन जीने का प्रयास करूंगा तो परिवार, फिर समाज, फिर राष्ट्र और फिर विश्व ऊपर उठेगा। भगवान महावीर के सिद्धांत विश्व के लिए उपयोगी है। व्रतमय सात्विक जीवन यह विश्व अपना ले तो विश्व में शांति स्थापित होगी।

उपाध्याय भगवंत ने कहा कि हम कैसे परिवार में जिए कि परिवार में हम तीन उद्देश्यों को प्राप्त कर सकें, यह हमेशा ध्यान रहना चाहिए। पहला उद्देश्य है परिवार में शांति स्थापित करने के निमित्त बने। कभी भी परिवार में अशांति स्थापित न करें। दूसरा उद्देश्य शांति के साथ संस्कारों की बगिया भी हम बना लें ताकि मर्यादित जीवन हो। तीसरा उद्देश्य होना चाहिए प्रगति। जिन चुनौती का सामना कर हम मनुष्य भाव में आए हैं ऐसा जीवन हो कि मानव से महामानव बने। इन उद्देश्यों को पूरा कर ही हमारा जीवन सफल हो सकता है । 

दादाबाड़ी के जीर्णोद्धार के लिए सोने-चांदी से भर गया कलश

अजमेर दादाबाड़ी के जीर्णोद्धार के लिए रविवार सुबह कलश यात्रा निकली। यह टैगोर नगर स्थित गौतम लोढ़ा के निवास से प्रारंभ होकर धर्मसभा में पहुंची। निर्माण कार्य के लाभार्थी परिवार गौतम लोढ़ा, कांकरिया परिवार सुमित ग्रुप,कमलजी नितेशजी लुनिया रायपुर, सुरेश बाघमार रायपुर, धर्मचंद निमानी रायपुर, रंजू प्रशांतजी मुंबई रहे। कलश की स्थापना परम पूज्य उपाध्याय भगवंत के मुखारविंद से वासक्षेप के साथ हुई। दादा गुरुदेव के जयकारों से धर्मसभा स्थल गुंजायमान हुआ। मंत्रोच्चार के साथ धर्मसभा में कलश रखा गया। एक कलश में परम पूज्य उपाध्याय भगवंत द्वारा वासक्षेप भरा गया और दूसरे कलश में लाभार्थी परिवार एवं धर्म सभा में उपस्थितजनों ने स्वर्ण-रजत आदि का दान किया।

पचरंगी तप महोत्सव आज से
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष श्याम सुंदर बैदमुथा ने बताया कि 28 जुलाई से 5 दिन का तप आरंभ हो रहा है। इस पचरंगी तप में प्रतिदिन नए तप होंगे। पहले दिन 28 जुलाई को निवि होगा। 29 जुलाई को एकसना, 30 को आयम्बिल, 31 जुलाई को बियासना और 1 अगस्त को उपवास होगा। इस तरह तप के जरिये पंचकल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। 28 जुलाई को परमात्मा के च्यवन कल्याणक की कल्पना करेंगे। 29 जुलाई को भगवान नेमिनाथ भगवान का जन्म कल्याणक, 30 जुलाई को दीक्षा कल्याणक, 31 जुलाई को कैवल्य ज्ञान और 1 अगस्त को भगवान पार्श्वनाथ का निर्वाण कल्याणक का अवसर आएगा।