राजिम कुंभ मेला के तीसरे दिन संस्कृति का महापर्व, लोककला-नृत्य की शानदार प्रस्तुतियों ने मोहा मन

On the third day of Rajim Kumbh Mela, a grand festival of culture, spectacular presentations of folk art and dance captivated the hearts.

राजिम कुंभ मेला के तीसरे दिन संस्कृति का महापर्व, लोककला-नृत्य की शानदार प्रस्तुतियों ने मोहा मन

मुख्य मंच पर पंडवानी, कथक और लोकनृत्यों ने पंडाल में रचा उत्सव जैसा माहौल
हिम्मत सिन्हा के कलाकारों ने बांधा समां, लोकसरगम की पुरवईया, छैला बाबू आही पर झूमे दर्शक

गरियाबंद, 04 फरवरी 2026

राजिम कुंभ कल्प मेला के तीसरे दिन मुख्य मंच पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका गंगा बाई मानिकपुरी की कपालिका शैली में पंडवानी गायन से हुई। कथा को और रोचक बनाने के लिए उन्होंने बीच-बीच में छत्तीसगढ़ी धार्मिक गीतों की प्रस्तुति दी, जिस पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं। इसके पश्चात मात्र 10 वर्ष की बालिका आरोही तिवारी ने रिकॉर्डेड कथक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। उसके पैरों की थाप और हाथों की सजीव मुद्राओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं 13 वर्षीय नित्या शुक्ला ने भी अत्यंत कुशलता के साथ कथक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की भरपूर सराहना बटोरी।
कार्यक्रम की अगली कड़ी में छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोककला मंच हिम्मत सिन्हा की धमाकेदार प्रस्तुति ने समां बांध दिया। “वक्रतुण्ड महाकाय...”, “ओम भुर्भुवः स्वः....”, “जय हो जगदम्बा जगतारिणी....” जैसे गीतों के माध्यम से ईष्ट देवों का स्मरण करते हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया। “पावन माटी के रीत हे, महान मेला मड़ई के आगे त्यौहार....” गीत के माध्यम से छत्तीसगढ़ के विविध पर्वों को मंच पर जीवंत किया गया। गीत सुनकर दर्शक भी त्यौहारों के रंग में रंग गए। “लोकसरगम के पुरवईया...” गीत ने खूब तालियां बटोरी, जबकि “वंदे मातरम” की प्रस्तुति ने पूरे पंडाल को देशभक्ति के भाव से भर दिया। इसके बाद सुवा नृत्य, गौरी-गौरा और पंथी नृत्य की प्रस्तुतियों ने एक बार फिर दर्शकों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और परंपराओं से रूबरू कराया। कलाकारों ने छैला बाबू आहीं... परदेषी बाबू आही...” की प्रस्तुति देकर दर्शक झूमने पर मजबूर कर दिया। कलाकारों का सम्मान स्थानीय जनप्रतिनिधयों एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने स्मृति चिन्ह और गुलदस्ता भेंटकर किया।