मंदसौर में हैं अष्टमुखी पशुपतिनाथ महादेव, एक ही समय में आठ अलग रूपों में होते हैं दर्शन
In Mandsaur, there is Ashtamukhi Pashupatinath Mahadev, one can see him in eight different forms at the same time
मंदसौर। मंदसौर में अष्टमुखी पशुपतिनाथ मंदिर हिंदू धर्म और सांस्कृतिक विरासत के स्थायी भाव का एक प्रमाण है। मप्र के ऐतिहासिक शहर मंदसौर में स्थित अष्टमुखी पशुपतिनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है, जो अपने अष्टमुखी दिव्य रूप के कारण भक्तों की श्रद्धा और आस्था का केंद्र बना हुआ है।
अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ मंदिर शिवना नदी के तट पर स्थित है। शिवना नदी के गर्भ से 19 जून 1940 को यह अलौकिक मूर्ति बाहर निकाली गई थी। नवंबर 1961 में वर्तमान मंदिर में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा स्वामी प्रत्यक्षानंदजी ने की थी।
काठमांडू के पशुपतिनाथ जैसी है मूर्ति
यह मूर्ति नेपाल के काठमांडू में स्थित श्री पशुपतिनाथ मंदिर की मूर्ति जैसी है। नेपाल की मूर्ति में चार मुख है और मंदसौर की मूर्ति में आठ मुख है। हालांकि, इतिहासकार बताते हैं कि मंदसौर में पशुपतिनाथ मंदिर का निर्माण पांचवीं शताब्दी में औंलिकर वंश के राजा यशोवर्मन ने कराया था।3
मूर्ति सुरक्षित रखने शिवना नदी में फेंक दी
ऐतिहासिक अभिलेखों और शिलालेखों से पता चलता है कि यह मंदिर प्राचीन काल में भी एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र था। बाद में विदेशी आक्रांताओं ने इस मंदिर पर भी हमला किया। और भक्तों ने मूर्ति सुरक्षित रखने के लिए शिवना नदी में फेंक दी थी। जिसे बाद में 1940 में बाहर निकाला गया।
अष्ट तत्वों को दर्शाते हैं आठों मुख
मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली का एक बेहतरीन उदाहरण है। इसकी विशेषता इसका ऊंचा शिखर और जटिल नक्काशी है। गर्भगृह में अलौकिक अष्टमुखी 7.3 फीट की मूर्ति है। शिवलिंग के ऊपर चार मुख और नीचे चार मुख स्थित है।
यहां पर भक्तों को जीवन की चारों अवस्थाओं के दर्शन होते हैं। पूर्व दिशा वाला मुख बाल्यावस्था को दर्शाता है, पश्चिम दिशा वाला मुख युवावस्था, उत्तर दिशा वाला मुख प्रौढ़ावस्था, दक्षिण दिशा वाला मुख किशोरावस्था का प्रतीक है।






