जैविक खेती की ओर किसानों का बढ़ता रुझान : प्राकृतिक खेती सेे कृषक दंपती को मिला लाभ
Growing trend of farmers towards organic farming: Farmer couple benefits from natural farming
रायपुर, 02 जनवरी 2026

राज्य में रसायन मुक्त एवं जैविक खेती की ओर किसानों का रुझान निरंतर बढ़ रहा है। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत किए जा रहे प्रयासों से कृषकों को न केवल प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन मिल रहा है, बल्कि उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। प्राकृतिक खेती को अपनाकर राजनांदगांव जिले के ग्राम मोखला के कृषक दंपती श्रीमती मनभौतिन बाई निषाद एवं श्री माखन निषाद ने सफलता की नई मिसाल पेश की है।
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत वर्ष 2025 में राजनांदगांव विकासखंड के 150 हेक्टेयर क्षेत्र में कलस्टर विकसित कर किसानों को जैविक एवं रसायन मुक्त खेती के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसी क्रम में ग्राम मोखला स्थित प्रगति महिला स्वसहायता समूह के कृषकों को जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, दशपर्णी अर्क सहित अन्य प्राकृतिक उत्पादों के निर्माण एवं फसल की अवस्था अनुसार उनके उपयोग का प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
इस प्रशिक्षण में ग्राम मोखला निवासी 68 वर्षीय कृषक श्रीमती मनभौतिन बाई निषाद एवं उनके 72 वर्षीय पति श्री माखन निषाद ने भाग लिया। शिवनाथ नदी किनारे स्थित मोखला के निवासी इस कृषक दंपती के पास कुल 2.34 एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें से 1.17 एकड़ स्वयं की तथा 1.17 एकड़ लीज पर ली गई भूमि है। पूर्व में वे धान एवं उद्यानिकी फसलों की खेती कर लगभग 50 से 60 हजार रुपये वार्षिक आय अर्जित कर रहे थे। श्रीमती मनभौतिन बाई निषाद ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अधिक उपयोग से स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को देखकर उन्होंने प्राकृतिक खेती अपनाने का निर्णय लिया। प्रारंभ में जानकारी के अभाव और उत्पादन कम होने की आशंका के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद रासायनिक खेती पर निर्भरता समाप्त हो गई।
उन्होंने बताया कि जहां रासायनिक खेती में प्रति एकड़ 20 से 22 हजार रुपये तक की लागत आती थी, वहीं प्राकृतिक खेती में जीवामृत, घनजीवामृत एवं नीमास्त्र जैसे उत्पाद घरेलू सामग्री से कम लागत में तैयार हो जाते हैं। देशी गाय का गोबर, गौमूत्र, मिट्टी एवं स्थानीय पत्तियों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ी है और लाभदायक सूक्ष्म जीवों की संख्या में वृद्धि हुई है। प्राकृतिक खेती से उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और जैविक कृषि उत्पाद का बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है। व्यापारी अब सीधे खेत से उपज खरीद रहे हैं, जिससे कृषक दंपती की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है। वर्ष 2025-26 रबी सीजन में वे सब्जियों के साथ तिवड़ा, मसूर एवं सरसों की खेती प्राकृतिक पद्धति से कर रहे हैं।






