अदाणी समूह ने पेश किया नया दावा, बाहरी मदद के बिना विकास संभव
Adani Group presented a new claim, development is possible without external help
नई दिल्ली : उद्योगपति गौतम अदाणी की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही है। सोमवार को अदाणी समूह के चेयरमैन और बिजनेसमैन गौतम अदाणी ने आज अपनी कंपनी के निवेशकों के सामने अपनी अलग अलग कंपनियों के फाइनेंशियल और लोन से संबिधित जानकारी साझा की है। इस विवरण में कंपनी को होने वाले मजबूत प्रॉफिट के अलावा कैश प्लो की भी जानकारी दी गई है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि बाहरी लोन की मदद के बिना भी कंपनी बढ़त हासिल कर सकती है।
पोर्ट्स से लेकर ग्रीन एनर्जी तक का कारोबार करने वाले समूह ने निवेशकों के समक्ष एक प्रस्तुतिकरण में अपने लगातार बढ़ते प्रॉफिट और कैश फ्लो पर प्रकाश डाला, जिससे समय के साथ उसकी बढ़ती महत्वाकांक्षाओं के लिए लोन पर निर्भरता कम हुई है।
इतने रुपये का निवेश
कंपनी के संस्थापक चेयरमैन गौतम अदाणी और 2 और अधिकारियों के खिलाफ अमेरिकी अदालत में सोलर एनर्जी कॉन्ट्रेक्ट हासिल करने के लिए इंडियन ऑफिसर्स को रिश्वत देने के आरोपों के बीच यह विवरण साझा किया गया है। अब इसकी टोटल वेल्थ क्रिएशन में इसका योगदान करीब 2/3 है, जो 5 साल पहले की तुलना में काफी अलग है। अदाणी ग्रुप ने पिछले 6 महीनों में करीब 75,227 करोड़ रुपये का निवेश किया है, जबकि कुल कर्ज में केवल 16,882 करोड़ रुपये की बढ़त हुई है। निवेशकों के साथ एक ‘नोट’ भी साझा किया गया, साथ ही ये प्रस्तुतियां भी दी गईं।
पर्याप्त कैश उपलब्ध
समूह की कैश की स्थिति को रेखांकित करते हुए ‘नोट’ में कहा गया है कि अदाणी समूह की कंपनियों के पास कम से कम 12 महीनों के लिए सभी लोन सर्विस की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त कैश है। 30 सितंबर 2024 तक अदाणी की कंपनियों के पास 53,024 करोड़ रुपये की नकदी थी, जो टोटल ग्रॉस डेब्थ बकाया का 21 प्रतिशत के करीब है।इसमें कहा गया कि यह राशि अगले 28 महीनों की लोन से संबंधित जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
बाह्य ऋण पर कम निर्भरता
समूह ने अगले 10 वर्षों में कंपनियों में 8 लाख करोड़ रुपये यानी 100 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा निवेश करने की योजना की घोषणा की है। पिछले 12 महीनों में ऑपरेशन से कैश फ्लो यानी एफएफओ या नकद प्रॉफिट 58,908 करोड़ रुपये रहा और पिछले 5 सालों से इसमें 30 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त हो रही है। इसके आधार पर कोई वृद्धि न होने की स्थिति में भी समूह अगले 10 वर्षों में अपने आंतरिक नकदी स्रोतों से केवल 5.9 लाख करोड़ रुपये का निवेश कर पाएगा जिससे बाह्य ऋण पर निर्भरता बहुत कम रह जाएगी।






