बोडाटोंगरी और बंदरचुआं में तसर पालन के संबंध हुआ प्रशिक्षण

Training regarding tassar rearing took place in Bodatongri and Bandarchua

बोडाटोंगरी और बंदरचुआं में तसर पालन के संबंध हुआ प्रशिक्षण

जशपुरनगर। विज्ञान से व्यवहार तक शीर्ष से ज़िले के बोडाटोंगरी और बंदरचुआ में तसर पालन हेतु किसानों के लिए प्रशिक्षण आयोजित किया गया। जिसमें 50 किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन केन्द्रीय तसर अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान रांची की वैज्ञानिक-बी डॉ. निधि सुखिजा तथा सहायक निदेशक रेशम श्याम कुमार द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत एमआरएमए मेरा रेशम मेरा अभियान पर चर्चा से हुई। विशेषज्ञों ने समझाया कि “मेरा” शब्द का तात्पर्य है “हम इसे अर्जित करते हैं”, जो किसानों में स्वामित्व और गर्व की भावना उत्पन्न करता है, जबकि “हमारा” केवल साझेदारी को दर्शाता है।

तकनीकी सत्रों में तसर पालन की वैज्ञानिक तकनीकों पर व्यावहारिक जानकारी दी गई, जिसमें प्रारंभिक अवस्था से लेकर अंतिम अवस्था तक की पालन प्रक्रियाएँ शामिल थीं। किसानों ने सक्रिय रूप से चर्चा में भाग लिया और देर अवस्था में होने वाले वाइरोसिस, चींटियों के हमले तथा अन्य प्रबंधन संबंधी समस्याओं पर अपने प्रश्न रखे। विशेषज्ञों ने इन चुनौतियों के समाधान हेतु वैज्ञानिक उपाय और रोकथाम के तरीके बताए, जिससे कीटों की जीवितता तथा कोया उत्पादन में सुधार हो सके।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सहायक निदेशक हैंडलूम युगेश्वर बंजारे  एवं ग्राम पंचायत सरपंच ने की। उन्होंने इस पहल की सराहना की और किसानों से वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने की अपील किए। ताकि क्षेत्र में सतत् रेशम कीट पालन को बढ़ावा मिल सके।