तीन दशकों बाद हुई शिक्षकों की कमी दूर

Teacher shortage resolved after three decades

तीन दशकों बाद हुई शिक्षकों की कमी दूर

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लागू युक्तियुक्तकरण नीति से गांव के स्कूलों की रौनक बढ़ गई है। स्कूली बच्चे भी अब खुशी-खुशी स्कूल जा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि लंबे समय से एकल शिक्षकीय शालाओं में अब दो-दो शिक्षकों की पदस्थापना से बच्चों की पढ़ाई अब बेहतर हो गई है। 3 दशकों से महासमुंद जिले के प्राथमिक शाला मुडियाडीह (पासीद) और प्राथमिक शाला नाँदबारू शाला एक शिक्षकीय थी।

ग्रामीणों ने बताया कि तीन दशकों से इन विद्यालयों में एकमात्र शिक्षक के भरोसे शिक्षा व्यवस्था चल रही थी। सीमित संसाधनों और भारी जिम्मेदारियों के बावजूद शिक्षकगण पूरी निष्ठा से कार्य करते रहे, लेकिन कई शैक्षणिक गतिविधियाँ प्रभावी ढंग से संचालित नहीं हो पा रही थीं। प्राथमिक शाला मुडियाडीह (पासीद) और प्राथमिक शाला नाँदबारू, जो 1994-95 से एकल शिक्षक विद्यालय के रूप में संचालित हो रहे थे।

सत्र 2024-25 में छत्तीसगढ़ शासन की युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत इन विद्यालयों को पहली बार दो-दो शिक्षक मिले हैं। यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं था, बल्कि इन विद्यालयों के लिए शैक्षणिक परिवर्तन का सकारात्मक पल था। दूसरे शिक्षक के आने से बच्चों के चेहरे पर नई ऊर्जा और उत्साह देखने को मिल रहा है। यहां पढ़ाई अब नियमित और व्यवस्थित हुई है। इसके अलावा खेलकूद, सांस्कृतिक, गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।