'एक थाली, एक थैला' अभियान में कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज का भी योगदान

Kanyakubj Brahmin community also contributed to the 'one plate, one bag' campaign

'एक थाली, एक थैला' अभियान में कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज का भी योगदान

रायपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पर्यावरण संरक्षण गतिविधि विभाग ने आगामी 13 जनवरी 2025 से प्रयागराज में आयोजित होने वाले महाकुंभ को प्लास्टिक और डिस्पोजेबल वस्तुओं से मुक्त कर हरित कुंभ के रूप में मनाने का संकल्प लिया है। इसके लिए देशभर में "एक थाली, एक थैला" अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें हर घर से एक थाली और थैला संग्रहित किया जाएगा।

कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज का सहयोग
इसी कड़ी में, 6 दिसंबर को रायपुर स्थित आशीर्वाद भवन में कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रतिनिधियों को थाली और थैला भेंट करने के लिए आमंत्रित किया। इस आयोजन में पं. धीरेन्द्र मिश्रा और श्रीमती प्राची मिश्रा विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान परशुराम की पूजा-अर्चना से हुआ।

पं. धीरेन्द्र मिश्रा ने कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ से 50 हजार से अधिक थाली और थैला संकलित कर महाकुंभ के लिए भेजने का लक्ष्य रखा गया है।

समाज की प्रतिबद्धता
कार्यक्रम के दौरान, कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज के सचिव पं. सुरेश मिश्रा ने अपने संबोधन में इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि "हरित कुंभ" का यह आयोजन पर्यावरण जागरूकता का अद्भुत प्रयास है और समाज की ओर से इसमें अधिकतम सहयोग देने का वचन दिया।

समाज के उपाध्यक्ष पं. राघवेन्द्र मिश्रा और कार्यकारिणी सदस्य पं. अजय अवस्थी ने भी अपने विचार व्यक्त किए और इस महान पहल का स्वागत किया।

पुष्टिकर ब्राह्मण समाज का योगदान
इस अवसर पर पुष्टिकर ब्राह्मण समाज ने भी कार्यक्रम में भाग लेते हुए थाली और थैला भेंट किए। संस्था के अध्यक्ष पं. चन्द्र प्रकाश व्यास ने कहा, "यह हमारा सौभाग्य है कि महाकुंभ में हमारा समाज योगदान दे रहा है। हम आगे भी हरसंभव सहयोग करेंगे।"

कार्यक्रम में सहसचिव पं. रज्जन अग्निहोत्री ने संचालन किया। इस दौरान वर्ल्ड ब्राह्मण फेडरेशन के अध्यक्ष पं. अरविन्द ओझा, कार्यकारिणी सदस्य पं. शशिकांत मिश्र, पं. जयकिशन जोशी, पं. धर्मेन्द्र ओझा, और पं. अशोक पुरोहित सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।



हरित कुंभ अभियान न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह सामाजिक सहभागिता और जागरूकता का भी प्रतीक बन गया है।