राजनीति व समाज के अनछुए पहलुओं पर चोट करती लेखक व राजनीतिक रणनीतिकार अतुल मलिकराम की 5 किताबें

5 books by writer and political strategist Atul Malikram that hit on the untouched aspects of politics and society

राजनीति व समाज के अनछुए पहलुओं पर चोट करती लेखक व राजनीतिक रणनीतिकार अतुल मलिकराम की 5 किताबें

- एक साथ 5 किताबों का विमोचन
- ऑनलाइन स्टोर्स फ्लिपकार्ट, अमेज़न, नोशन प्रेस पर उपलब्ध 'दिल से', 'गल्ला दिल दी', 'दिल विल', 'दिल-दश्त', और 'कसक दिल की' 
- प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित सभी लोगों को भेंट की गईं किताबों की प्रतियां 

इंदौर, 8 अगस्त 2024: राजनीति, समाज, संस्कृति, शिक्षा, प्रेरणा, व्यवसाय व सतत विकास लक्ष्यों पर आधारित लेखक और राजनीतिक रणनीतिकार अतुल मलिकराम की पांच किताबों 'दिल से', 'गल्ला दिल दी', 'दिल विल', 'दिल-दश्त', और 'कसक दिल की' का गुरुवार को इंदौर में विमोचन किया गया। इस अवसर पर विभिन्न मीडिया चैनलों, साहित्यकारों, और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। अतुल ने  इन किताबों में अपने व्यक्तिगत और सामाजिक अनुभवों को विभिन्न रोचक लेखों के माध्यम से साझा किया है। यह सीरीज न केवल वर्तमान समय की ज्वलंत समस्याओं पर प्रकाश डालती है, बल्कि भविष्य के लिए एक सकारात्मक दृष्टिकोण भी प्रदान करती है। यह सभी किताबें ऑनलाइन स्टोर्स पर बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। 

इस मौके पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए अतुल मलिकराम ने कहा कि, "इन किताबों का उद्देश्य लोगों को कुछ ऐसे विषयों की तरफ आकर्षित करना है, जिनपर हम चाह कर भी ध्यान नहीं दे पाते। सभी किताबों में एक कॉमन शब्द 'दिल' है, और इनमें चुने गए सभी विषय मेरे दिल की उस आवाज को शब्दों में बयान करते हैं, जिसे मैंने एक सामान्य व्यक्ति से विशेष व्यक्तित्व का सफर तय करने के दौरान महसूस किया है। समाज में कैदी और अपराधी के बीच अंतर की बात हो या गाय की पहली और कुत्ते की आखिरी रोटी जैसी अनुपम भारतीय संस्कृति की, गुमनाम होता किताबें पढ़ने का कल्चर हो या वीराने से गुजरती मित्रता की परिभाषा, हम आधुनिकता के दौर से गुजरते हुए, वास्तविकता से दूरी बनाते जा रहे हैं और कहीं न कहीं अपने सांस्कृतिक पदचिन्हों को मिटाते जा रहे हैं। इन किताबों की सीरीज के जरिये मैंने राजनीति, धर्म, इंसानियत, मोहब्बत, व्यापार और व्यवहार जैसे उन तमाम मुद्दों को प्रकाशित करने का प्रयास किया है, जो हमें एक आदर्श समाज के रूप में जागरूक बनने और स्वयं को पुनः तलाशने के लिए प्रेरित करता है।"

'गल्लां दिल दी' किताब में सतत विकास लक्ष्यों को समर्पित खंड भी शामिल किया गया है, जिसमें देश की गरीबी, भुखमरी, लैंगिक समानता व अशिक्षा जैसे विषय प्रमुखता से देखने को मिलते हैं। इसके अलावा रोम रोम में राम, शब्दों के पीछे के शब्द, गरीबी और सफलता, मन की बिमारी जैसे गंभीर विषयों को शिक्षा और प्रेरणा खंड में देखा जा सकता है। वहीं 'दिल से' किताब में एकतरफा प्यार का अधिकार, पथप्रदर्शक की भूमिका, पांच रंगो से सुशोभित तिरंगा, प्रदुषण और गरीबी, इंसान और इंसानियत, जैसे सामाजिक पहलुओं के साथ-साथ ऑनलाइन फ़ूड डेलिवरी की संस्कृति, इन्दोरी बनने की कला जैसे सांस्कृतिक पहलुओं को कवर करने का प्रयास किया गया है। इसके अतिरिक्त संयम और मेहनत से जुड़ा भाग्य, शब्दों से सफलता जैसे प्रेरक लेख भी देखने को मिलते हैं। वहीं यह किताब मदद के आगे माया का मोल, देव काल से चला आ रहा पब्लिक रिलेशन, पीआर प्रैक्टिसनर्स के लिए मदर टेरेसा की 7 बातें जैसे व्यावसायिक गुण भी सिखाती है। 

किताब 'दिल विल' में मध्य प्रदेश में तीसरे दल की भूमिका, एससी-एसटी मतों को साधने की रणनीति, चुनावों पर होने वाले बेलगाम खर्च, जेल में तैयार होते अपराधी, पृथक बुंदेलखंड की मांग और छोटे राज्यों के गठन में कैसी बुराई जैसे राजनीतिक विषय शामिल हैं। इसके अलावा शिक्षित होने के सही मायने, समाज का आधार शिक्षित महिलाएं, आगे पाठ-पीछे सपाट, ऑनलाइन शिक्षा, खरगोश-कछुए की कहानी के बाद की कहानी, 5वीं और 8वीं में बोर्ड परीक्षाएं जैसी शिक्षा और प्रेरणा से भरे लेख भी देखे जा सकते हैं। एक मानसिक बिमारी बलात्कार, दो वक्त की रोटी, काला अक्षर इंसान बराबर और दान केवल पैसे वालों का काम नहीं जैसे रोचक लेख समाज और संस्कृति खंड में देखने को मिलते हैं। 

'दिल दश्त' किताब अपने नाम के अनुरूप विलुप्त होती घुमन्तु जनजातियां, महिला कैदियों की दुर्दशा, भारतीय संस्कृति में नाईट कल्चर जैसे महत्वपूर्ण राजनितिक व सामाजिक मुद्दों को समेटी हुई है। इसके अतिरिक्त इस किताब में दक्षिण और उत्तर भारतीयों के बीच शिक्षा में असमानता, गुरुओं के महत्व, चाँद पर भारत की पहुंच, स्वयं की खोज, टमाटर से सीख, माँ का पीआर एक्सपर्ट किरदार जैसे प्रेरक और व्यावसायिक लेख भी पाठकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। जबकि 'कसक दिल की' किताब डिजिटल युवा, 2030 को केंद्र में रखकर तीन राज्यों के मुख्यमंत्री, नीतीश कुमार का राजनीतिक चरित्र जैसे महत्वपूर्ण राजनीतिक विषयों के साथ-साथ युवा पीढ़ी और शादी-विवाह का चंगुल, शिकायत खुद से, अच्छी परवरिश पर पैसा भारी, गुरु बनने का गुरुर, वास्तविकता या भ्रम देश की सशक्त महिला, नारा नहीं हैं राम, संस्कार ही पहचान, कल हो न हो जैसे सामाजिक और सांस्कृतिक विषय नजर आते हैं। यह किताब शिक्षा और प्रेरणा खंड में हमें कलम की टीस, जादू की पाठशाला, न वो गलत न हम, शिक्षा प्रणाली में सेक्स एजुकेशन का स्थान, सोने की चिड़ियाँ के प्राण जैसे महत्वपूर्ण विषय देखने को मिलते हैं। इसके अलावा, कब और क्यों पीआर एजेंसी की जरुरत, कर्मचारियों से चलती कंपनियां, कॉर्पोरेट में शिव, विष्णु और पार्वती जैसा व्यक्तित्व, रीजनल पीआर के पिलर्स जैसे व्यावसायिक विषयों को भी कवर किया गया है। 
 
अतुल मलिकराम की इन किताबों को पहले ही साहित्य जगत में काफी सराहा जा रहा है और उम्मीद है कि यह पाठकों के बीच भी लोकप्रिय होंगी। देश के पहले और एकमात्र एंगर मैनेजमेंट कैफे 'भड़ास' की शुरुआत करने वाले अतुल इंदौर में तीन डे केयर सेंटर्स का संचालन भी कर रहे हैं। वहीं अपनी सामाजिक संस्था बीइंग रिस्पोन्सिबल के माध्यम से बेजुबान पक्षियों के लिए दाना पानी, जरूरतमंदों के लिए नंगेपांव और स्ट्रीट वेंडर्स के लिए मेरा नाम मेरी पहचान जैसे अभियान भी चला रहे हैं। सामाजिक परिवर्तन लाने में उत्कृष्ट भूमिका निभाने के लिए उन्हें प्रतिष्ठित गॉडफ्रे फिलिप्स रेड एंड वाइट गोल्ड अवार्ड से सम्मानित भी किया जा चुका है।