प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ पर विशेष: भगवान राम सभी के हैं और उनका संदेश सार्वभौमिक
Special on the first anniversary of Prana Pratishtha: Lord Ram belongs to everyone and his message is universal
विगत वर्ष हिंदू पंचांग के अनुसार 22 जनवरी को पौष मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मेष लग्न और अभिजीत मुहूर्त में श्रीरामलला प्राण प्रतिष्ठा का कार्य पूरा हुआ था। पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित के द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य यजमानी एवं देश के विख्यात जनो के सानिध्य में अनुष्ठान संपन्न हुआ था। आज श्रीरामलला प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव वर्षगांठ है।
श्री राम मंदिर का निर्माण एक लंबी ऐतिहासिक और कानूनी प्रक्रिया के बाद संभव हो पाया है। सदियों पुराने विवाद को सुप्रीम कोर्ट ने नौ नवंबर 2019 के ऐतिहासिक फैसले के जरिए सुलझाया। इस निर्णय ने न्यायपालिका के प्रति देश की आस्था को और मजबूत किया और विवाद की जगह पर भव्य मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया।
कोर्ट का फैसला, सरकार की भूमिका…और राम मंदिर निर्माण
श्री राम मंदिर अयोध्या के निर्माण में मोदी सरकार की भूमिका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूपों में महत्वपूर्ण रही है। सरकार ने इस ऐतिहासिक परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए विभिन्न स्तरों पर योगदान दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मोदी सरकार ने आवश्यक कदम उठाकर मंदिर निर्माण की दिशा में गति प्रदान की। भारत सरकार ने तत्काल श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्ट का गठन किया।
ट्रस्ट में दक्ष प्रशासनिक अधिकारी. विधि विशेषज्ञ, सनातनी धर्माचार्य और लब्ध प्रतिष्ठ जन शामिल हुए, जो मंदिर निर्माण से संबंधित सभी गतिविधियों का प्रबंधन कर रहा है। ट्रस्ट को भूमि सौंपने, निर्माण कार्य, चंदा संग्रह का दायित्व सौंपा गया है।
अयोध्या के समग्र विकास के लिए मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने कई योजनाओं की शुरुआत की। अयोध्या में राष्ट्रीय राजमार्गों का विकास, रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डे का विस्तार,होटल, धर्मशालाएं, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का निर्माण किया।
5 अगस्त को 2020 को भूमि पूजन के पश्चात मंदिर आकार लेने लगा। सर्वश्रेष्ठ मूर्तिकार अरुण योगीराज ने रामलला की मूर्ती को कृष्ण शिला ( शालिग्राम पत्थर) से भगवान राम की 51 इंच की 5 वर्ष के बाल स्वरूप को आकार दिया।
राम मंदिर निर्मित क्षेत्रफल 57,400 वर्ग फुट है। मंदिर 360 फीट लंबा, 235 फीट चौड़ा और 161 फीट ऊंचा है। राम मंदिर का स्थापत्य नागर शैली का अनुसरण करता है, जो जटिल शिल्प कौशल और डिजाइन का दर्पण प्रस्तुत करता है।
ऊंचे शिखर मंदिर की भव्यता में चार चांद लगाते हैं। निर्माण प्रक्रिया में पारंपरिक और आधुनिक तकनीकों का मिश्रण विरासत और प्रगति के सम्मिश्रण का प्रतीक है। यह मंदिर हिंदुओं के लिए एक महान तीर्थ स्थान है।






