महादेव तालाब सौंदर्यीकरण में लापरवाही, नपा अध्यक्ष ने ठेकेदार को लगाई फटकार

Negligence in beautification of Mahadev pond, Nagar Panchayat President reprimanded the contractor

महादेव तालाब सौंदर्यीकरण में लापरवाही, नपा अध्यक्ष ने ठेकेदार को लगाई फटकार

कड़ी कार्रवाई की चेतावनी, भुगतान रोक व ब्लैकलिस्ट की तैयारी

बीजापुर। नगर के प्रमुख जल स्रोत और धार्मिक स्थल महादेव तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। नगरपालिका अध्यक्ष गीता सोम पुजारी और पार्षदों की टीम ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया, जहां गुणवत्ता में भारी अनियमितताएं सामने आईं। कार्य की धीमी गति और घटिया निर्माण पर सभी जनप्रतिनिधियों ने ठेकेदार पर कड़ी नाराजगी जताई।

5.08 करोड़ के ठेके में लापरवाही, ठेकेदार पर 9 नोटिस

कीर्ति कंस्ट्रक्शन को दिए गए ₹5 करोड़ 08 लाख के ठेके के तहत तालाब के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का कार्य चल रहा है, लेकिन काम की रफ्तार कछुए जैसी और गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई। पालिका अध्यक्ष ने बताया कि ठेकेदार को अब तक 9 नोटिस जारी किए जा चुके हैं, फिर भी सुधार नहीं हुआ।

जमीन पर मिली खामियां, मीडिया रिपोर्ट से मचा हड़कंप
मीडिया में लगातार आ रही शिकायतों के बाद ही पालिका की टीम ने निरीक्षण किया। मौके पर घटिया निर्माण सामग्री, अधूरे काम और निर्धारित मापदंडों की अनदेखी स्पष्ट रूप से दिखी। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि सरकारी राशि की खुलेआम बर्बादी हो रही है।

कड़ी कार्रवाई की चेतावनी: भुगतान रोक, ब्लैकलिस्ट की तैयारी

अध्यक्ष गीता सोम पुजारी ने साफ कहा कि यदि निर्माण कार्य में गुणवत्ता नहीं आई तो ठेकेदार का भुगतान रोकने और उसे ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जाएगी। संबंधित विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्थिति में गुणवत्ता से समझौता न किया जाए।

निरीक्षण में कौन-कौन रहे मौजूद?
इस निरीक्षण में पालिका पार्षद बसंती लिंगम, सत्यवती परतागिरी, संजय रिवानी, मुकेश राठी, विक्रम दूधी, हितेश साहनी, छोटू पुजारी और भंडारी उपस्थित रहे। सभी ने निर्माण कार्य पर गहरी नाराजगी जाहिर की और गुणवत्ता की जांच की मांग की।

बीजापुर का महादेव तालाब, जो नगर की पहचान और श्रद्धा का केंद्र है, उसका सौंदर्यीकरण अगर इसी तरह लापरवाही से होगा, तो यह सिर्फ धन की बर्बादी नहीं बल्कि जनता की भावना के साथ धोखा भी होगा। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन ठेकेदार के खिलाफ ठोस कदम उठाएगा या फिर यह मामला भी नोटिसों की खानापूर्ति में सिमट जाएगा।