धान से ब्राम्ही तक : कम लागत में अधिक लाभ की ओर अग्रसर किसान

From Paddy to Brahmi: Farmers moving towards higher profits at lower costs

धान से ब्राम्ही तक : कम लागत में अधिक लाभ की ओर अग्रसर किसान

रायपुर, 13 फरवरी 2026

 धान से ब्राम्ही तक : कम लागत में अधिक लाभ की ओर अग्रसर किसान

 धान से ब्राम्ही तक : कम लागत में अधिक लाभ की ओर अग्रसर किसान

ब्राम्ही की खेती किसानों के लिए आय का नया और भरोसेमंद फसल है l  यह एक प्रमुख औषधीय पौधा है, जिसका उपयोग याददाश्त बढ़ाने, मानसिक शांति और आयुर्वेद में किया जाता है, जिससे इसकी बाजार में मांग बहुत है। छत्तीसगढ़ औषधि पादप बोर्ड जैसे संस्थानों द्वारा इसे प्रोत्साहित किया जा रहा है, और कुछ स्थानों पर सीधे खरीद (Buy Back) की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे किसानों को सीधा फायदा हो रहा है l 

 धान से ब्राम्ही तक : कम लागत में अधिक लाभ की ओर अग्रसर किसान

ब्राम्ही की खेती तरफ किसानों का रुझान

     छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के प्रयासों से राज्य के किसान अब पारंपरिक धान की खेती के साथ-साथ औषधीय फसलों की ओर भी तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। विशेष रूप से ब्राम्ही की खेती किसानों के लिए आय का नया और भरोसेमंद माध्यम बनकर उभरी है।

 धान से ब्राम्ही तक : कम लागत में अधिक लाभ की ओर अग्रसर किसान

ब्राम्ही का उपयोग स्मरण शक्ति बढ़ाने, मानसिक स्वास्थ्य सुधारने में सहायक

        बोर्ड द्वारा संचालित औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती योजना के अंतर्गत किसानों को ब्राम्ही की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। ब्राम्ही एक ऐसी औषधीय फसल है, जिसकी लागत कम और लाभ अधिक है। एक बार रोपण करने के बाद 3 से 4 वर्षों तक हर तीन माह में इसकी कटाई की जा सकती है। ब्राम्ही का उपयोग स्मरण शक्ति बढ़ाने, मानसिक स्वास्थ्य सुधारने, मस्तिष्क संबंधी औषधियों तथा सौंदर्य उत्पादों के निर्माण में किया जाता है, जिससे बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है।

ब्राम्ही की खेती से किसानों को लगभग 1 लाख 20 हजार रूपए तक शुद्ध लाभ

       जहां धान की खेती में प्रति एकड़ लागत अधिक और मुनाफा सीमित होता है, वहीं ब्राम्ही की खेती में सालाना लागत लगभग 21 हजार रुपये तक आती है और एक वर्ष में लगभग 30 क्विंटल तक उत्पादन से किसानों को करीब 1 लाख 50 हजार रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है। इस प्रकार किसानों को लगभग 1 लाख 20 हजार रूपए तक का शुद्ध लाभ मिल रहा है। यही कारण है कि किसान अब ब्राम्ही की खेती को लाभकारी विकल्प के रूप में अपना रहे हैं।

किसानों को ब्राम्ही के लिए बाजार की चिंता नहीं

      बोर्ड द्वारा किसानों को ब्राम्ही की रोपण सामग्री निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उनकी प्रारंभिक लागत और कम हो गई है। साथ ही किसानों की उपज के विक्रय की समस्या को दूर करते हुए पहले से ही क्रय अनुबंध की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है, जिससे किसानों को बाजार की चिंता नहीं रहती।

रायपुर एवं धमतरी जिले के लगभग 36 किसान 15 एकड़ क्षेत्र में ब्राम्ही की खेती

       ब्राम्ही की खेती छत्तीसगढ़ की जलवायु और भूमि अत्यंत उपयुक्त है। यह नमी एवं जलभराव वाले क्षेत्रों में भी आसानी से उग जाती है, जहां अन्य फसलों में नुकसान की आशंका रहती है। इसी कारण अब किसान धीरे-धीरे धान के साथ वैकल्पिक खेती की ओर आगे बढ़ रहे हैं। वर्तमान में रायपुर एवं धमतरी जिले के लगभग 36 किसान 15 एकड़ क्षेत्र में सफलतापूर्वक ब्राम्ही की खेती कर रहे हैं और अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम ब्राम्ही

       छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने किसानों की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार और निरंतर प्रयासों से औषधीय पौधों की खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन रही है। उन्होंने बताया कि बोर्ड किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, रोपण सामग्री और विपणन सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। 

औषधीय की खेती में छत्तीसगढ का अग्रणी स्थान

        राज्य में औषधीय पौधों की खेती को नई पहचान मिलने के साथ साथ छत्तीसगढ़ में उत्पादित ब्राम्ही और अन्य औषधीय पौधों की मांग भविष्य में देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बढ़ेगी और राज्य औषधीय खेती के क्षेत्र में अग्रणी स्थान प्राप्त करेगा।

ब्राम्ही की खेती से आत्मनिर्भर बनता किसान

       वन विभाग और बोर्ड के संयुक्त प्रयासों से आज छत्तीसगढ़ के किसान नई सोच के साथ खेती कर रहे हैं। ब्राम्ही की खेती न केवल उनकी आय बढ़ा रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता की नई राह भी दिखा रही है।