महिला उद्यमिता और वित्तीय साक्षरता पर चार दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण सम्पन्न

Four-day residential training on women entrepreneurship and financial literacy concluded

महिला उद्यमिता और वित्तीय साक्षरता पर चार दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण सम्पन्न

महासमुंद। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत महिला उद्यमिता और वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महासमुंद जिले में चार दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एस. आलोक के मार्गदर्शन में आरसेटी परिसर में संपन्न हुआ।

यह कार्यक्रम प्रशिक्षण का दूसरा बैच था, जिसमें जिले के विभिन्न विकासखंडों बसना, सरायपाली, बागबाहरा, पिथौरा और महासमुंद से 30 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इससे पूर्व आयोजित पहले बैच सहित कुल 60 महिलाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। प्रशिक्षण में वित्तीय साक्षरता समुदाय संसाधन व्यक्ति, बैंक सखी तथा प्रशिक्षण संसाधन व्यक्ति जैसी भूमिकाओं को सशक्त बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। कार्यक्रम में तकनीकी सहयोग संस्था “सा-धन” की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संस्था के मास्टर ट्रेनर्स के साथ-साथ कोरबा के जिला प्रमुख नीरज ठाकुर और महासमुंद के जिला प्रमुख दिलीप साहू ने प्रतिभागियों को बैंकिंग प्रक्रियाएं, महिला उद्यमी ऋण विकल्प, और विभिन्न वित्तीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की।

प्रशिक्षण के दौरान महिला उद्यमिता को केंद्र में रखते हुए प्रतिभागियों को यह सिखाया गया कि वे किस प्रकार स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से बैंकिंग प्रणाली से जुड़ सकती हैं, ऋण प्राप्त कर सकती हैं और अपने व्यवसाय को स्थापित व विस्तारित कर सकती हैं। इस प्रक्रिया को सहज और प्रभावी बनाने हेतु खेलों, समूह गतिविधियों और संवादात्मक सत्रों का उपयोग किया गया, जिससे प्रतिभागियों में सीखने के प्रति उत्साह बना रहा। साथ ही सीजीएसआरएलएम (बिहान) स्टाफ को भी प्रशिक्षित किया गया ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में महिलाओं को मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान कर सकें। सभी प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक बताया तथा इसे अपने कार्यक्षेत्र में लागू करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमियों की पहचान कर उनके व्यवसाय को सशक्त बनाना, महिलाओं को वित्तीय निर्णय लेने में समर्थ बनाना, और उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना रहा।