धर्मांतरण के झूठे आरोपों के विरोध में मसीही समाज का प्रदर्शन

Christian community protests against false allegations of conversion

धर्मांतरण के झूठे आरोपों के विरोध में मसीही समाज का प्रदर्शन

जामुल थाने के सामने गाया धार्मिक गीत

भिलाई। कैलाशनगर चर्च में बीते रविवार को धर्मांतरण के आरोपों के बाद पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के विरोध में बुधवार को मसीही समाज ने जामुल थाने के सामने शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ प्रदर्शन किया। समाज के लोगों ने थाने के सामने बैठकर धार्मिक गीत गाए और प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाते हुए असामाजिक तत्वों पर एफआईआर की मांग की।

इस प्रदर्शन के दौरान यूनाइटेड क्रिश्चियन काउंसिल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर जोनाथन जॉन ने कहा कि जैसे किसी को मंदिर, मस्जिद या गुरुद्वारा जाने से रोका नहीं जा सकता, वैसे ही किसी को गिरिजाघर आने से रोकना या वहां जाने पर मारपीट करना सीधे धार्मिक स्वतंत्रता का हनन है। कुछ असामाजिक तत्व हमारे समुदाय को राजनीतिक फायदे के लिए निशाना बना रहे हैं।

धर्मगुरुओं को जेल भेजने पर भड़का आक्रोश
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना सटीक जांच के 6 लोगों को झूठे आरोप में जेल भेज दिया। यही नहीं, जेल में बंद धर्मगुरुओं के साथ कथित मारपीट और अमानवीय व्यवहार किया गया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ है, और उनके धर्मगुरुओं के शरीर पर अब भी चोट के निशान हैं।

प्रशासन से की निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
प्रदर्शन के दौरान भिलाई नगर सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी और उप पुलिस अधीक्षक मोनिका नवी पांडेय मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की।
मसीही समाज ने साफ कहा कि अगर कोई व्यक्ति जबरदस्ती धर्मांतरण कराता है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन झूठे आरोप लगाकर पूरे समाज को निशाना बनाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उग्र आंदोलन की चेतावनी
समुदाय के नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर झूठे मामलों की जांच नहीं हुई और धर्मगुरुओं के साथ हुई ज्यादती पर कार्रवाई नहीं हुई, तो मसीही समाज उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

“हम शांति चाहते हैं, लेकिन अगर प्रशासन आंख मूंदे बैठा रहा तो सड़कों पर उतरना हमारी मजबूरी होगी,” – प्रदर्शन में शामिल एक वरिष्ठ मसीही प्रतिनिधि ने कहा।

क्या है मामला?
बीते रविवार कैलाशनगर चर्च में धार्मिक सभा के दौरान धर्मांतरण के आरोप लगाकर 6 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद से मसीही समाज में नाराजगी और आक्रोश है। समाज का कहना है कि यह सब राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित है और धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।