महज तीन घंटे में खोद दिए 660 सोख्ता गड्ढे, कोरिया में बना नया रिकॉर्ड...
660 soak pits were dug in just three hours, a new record was set in Korea...
जनभागीदारी से कोरिया जिले का नाम ‘द गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड’ में दर्ज
कोरिया। कोरिया जिला प्रशासन द्वारा चलाई जा रही ‘आवा पानी झोंकी‘ अभियान के तहत गुरुवार सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक जनभागीदारी से जिले के तीनों नगरीय निकाय बैकुण्ठपुर नगर पालिका, शिवपुर-चरचा नगर पालिका तथा नगर पंचायत पटना सहित बैकुण्ठपुर, सोनहत विकासखण्ड के ग्रामों में 660 सोख्ता गढ्ढे का निर्माण किया गया। इस काम के लिए ‘द गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड’ में कोरिया जिला दर्ज हो गया।
यह गड्ढे इस लिये किए गए हैं कि बरसाती पानी जमीन के अंदर जाए और भूजल स्तर बढ़ सके। जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों-कर्मचारियों की मौजूदगी में ग्रामीणों ने पानी बचाने की शपथ भी ली। जिले के दोनों विकासखंडों के 162 ग्रामों में 4-4 यानी 648 और तीनों नगरीय निकायों में 12 इस तरह 660 सोख्ता गड्ढे जनभागीदारी के माध्यम से खोदे गए।
‘द गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड‘ के रीजनल कार्यालय, रायपुर से पहुंची श्रीमती सोनाली राजेश शर्मा ने बताया कि यह बहुत खुशी की बात है कि कोरिया जिला प्रशासन के अभिनव पहल से पानी बचाने के लिए जनभागीदारी के तहत 660 गढ्ढे महज तीन घंटे में खोदे गए हैं, इस काम के लिए ‘द गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड’ में कोरिया जिला दर्ज हो गया। उन्होंने इस अवसर पर कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी को मैडल और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। श्रीमती सोनाली राजेश शर्मा ने कहा कि ‘द गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड’ के मापदंड को कोरिया जिला ने पूरा किया है, निश्चित ही अन्य जिलों के लिए यह एक प्रेरक संदेश जाएगा।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने बताया कि बरसाती पानी को रोकना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि कलेक्टर के मार्गदर्शन में यह कार्य रिकार्ड समय में पूरा किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि जहां सोख्ता गड्ढे खोदे गए थे, वहां की फोटो भी निर्धारित समय सुबह 9 से दोपहर 12 बजे ली गई है। डॉ. चतुर्वेदी ने कहा इतने स्ट्रक्चर्स से 60 सामान्य आकार के तालाबों के बराबार पानी हर साल भूमि में जाएगा, यानी इस उपाय से भूजल स्तर बढ़ेगा और आने वाले समय में पानी की समस्या से कुछ हद तक निजात भी मिलेगी। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत 660 सोखता गड्ढे बनाए गए हैं, जिसकी शासकीय लागत 42 लाख 90 हजार रुपए के कार्य को जनभागीदारी के माध्यम से पूरा किया गया।






