ट्रंप रोकेंगे यूक्रेन-रूस युद्ध? म्यूनिख में जेलेंस्की से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल...

Will Trump stop the Ukraine-Russia war? Delegation will meet Zelensky in Munich...

ट्रंप रोकेंगे यूक्रेन-रूस युद्ध? म्यूनिख में जेलेंस्की से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल...

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने चुनाव अभियान के दौरान ही रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने की बात कही थी। अब राष्ट्रपति पद संभालते ही ट्रंप ने इसकी कोशिश शुरू कर दी है। इन्हीं कोशिश के तहत डोनाल्ड ट्रंप के वरिष्ठ सलाहकार और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस हफ्ते यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से म्यूनिख में मुलाकात कर सकते हैं। म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने को लेकर चर्चा हो सकती है। इसी सम्मेलन से इतर अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल यूक्रेनी राष्ट्रपति से मिलेगा।

म्यूनिख की बैठक होगी बेहद अहम
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रूबियो और डोनाल्ड ट्रंप के विशेष प्रतिनिधि रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल कीथ केलोग शामिल हैं। कीथ केलोग ने कहा कि बेहतर होगा कि यूक्रेन के राष्ट्रपति उन तीनों से साथ मिलें। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप भी जेलेंस्की से बात कर सकते हैं। इस बैठक में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल, जेलेंस्की से युद्ध खत्म करने के विकल्पों पर चर्चा कर सकता है। इस बैठक की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका, बैठक से पहले यूरोपीय देशों से भी बात कर रहा है और कीथ केलोग, वॉशिंगटन में यूरोपीय राजदूतों से मुलाकात कर रूस-यूक्रेन युद्ध रुकवाने को लेकर चर्चा कर रहे हैं।

ट्रंप ने यूक्रेन को दिया है ये ऑफर
उल्लेखनीय है कि डोनाल्ड ट्रंप कह चुके हैं कि अमेरिका के करदाताओं के अरबों डॉलर यूक्रेन को आर्थिक मदद देने में खर्च हुए हैं, जबकि यूरोप इसके लिए कुछ खास प्रयास नहीं कर रहा है। ट्रंप ने ये भी कहा कि अमेरिका ने जो यूक्रेन की आर्थिक मदद की उसके बदले में यूरोपीय देशों को अमेरिका को भुगतान करना चाहिए। ट्रंप ने ये भी कहा है कि उनका प्रशासन, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के संपर्क में भी है। हालांकि उन्होंने इस बारे में ज्यादा जानकारी देने से इनकार कर दिया। डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि वह यूक्रेन के साथ एक समझौता करना चाहते हैं कि अगर यूक्रेन, अमेरिका की आर्थिक मदद चाहता है तो उसे अपने दुलर्भ खनिज भंडार, तेल और अन्य चीजों का नियंत्रण अमेरिका को देना होगा।