क्या 2029 में हो जाएंगे एक साथ चुनाव? जानिए वन नेशन-वन इलेक्शन से जुड़े हर सवाल का जवाब

Will there be simultaneous elections in 2029? Know the answer to every question related to One Nation-One Election

क्या 2029 में हो जाएंगे एक साथ चुनाव? जानिए वन नेशन-वन इलेक्शन से जुड़े हर सवाल का जवाब
नई दिल्ली। संविधान लागू होने के बाद साल 1951-52 में देश में पहली बार चुनाव कराए गए थे। शायद नीति निर्माताओं को भविष्य की जरूरत पता थी, इसलिए लोकसभा और राज्य की विधानसभाओं के लिए चुनाव एक साथ कराए गए थे।

लेकिन 1967 के बाद से परंपरा बिगड़ गई। कहीं राज्य की विधानसभा को भंग करना पड़ा, तो कभी लोकसभा चुनाव ही पहले करा लिए गए। आलम ये हो गया कि अब देश में हर साल किसी न किसी राज्य में चुनाव होता ही है।

2029 में एक साथ होंगे चुनाव

लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार एक बार फिर इस परंपरा को शुरू करने जा रही है। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो 2029 में पहली बार देश में एक साथ चुनाव होंगे। लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकाय के चुनावों के लिए देश एक साथ वोट डालने निकलेगा।
लेकिन ये सुनने में जितना आसान लग रहा है, उतना है नहीं। केंद्र सरकार को इसके लिए संविधान में जरूरी संशोधन करने पड़ेंगे और इसके लिए उसे दो तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। इसके बाद अगर राज्यों की सहमति की जरूरत पड़ी, तो विपक्षी दलों के नेतृत्व वाले राज्य अड़चन पैदा करेंगे।

अब जब चर्चा यहां तक पहुंच गई है कि वन नेशन-वन इलेक्शन को शीतकालीन सत्र में ही पेश किया जा सकता है, तो इससे जुड़े कुछ अहम बातें जान लेनी जरूरी हैं।

उनका तर्क था कि बार-बार चुनाव होते रहने से देश की प्रगति पर असर पड़ता है। 2015 में लॉ कमीशन ने भी सुझाव दे दिया कि वन नेशन-वन इलेक्शन से करोड़ों रुपयों की बचत हो सकती है।

पार्टियों से हुई बातचीत

2019 में नरेंद्र मोदी दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने। उन्होंने सभी पार्टियों के साथ विचाक-विमर्श के लिए पहली बार औपचारिक बैठक बुलाई। लेकिन कुछ निष्कर्ष नहीं निकल पाया।

2024 मे फिर से चुनाव होने थे। लेकिन इससे पहले ही सितंबर 2023 में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर दिया गया। इसमें कोविंद के अलावा, वकील हरीश साल्वे, गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी, डीपीए पार्टी के नेता गुलाम नबी आजाद और 3 पूर्व अफसर थे।

राष्ट्रपति को सौंपी गई रिपोर्ट

कोविंद कमेटी ने इस पर 18,626 पन्नों की एक रिपोर्ट मार्च 2024 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंप दी। अब जाकर केंद्रीय कैबिनेट ने इस बिल को मंजूरी दे दी है और इसे शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।

लेकिन बिल के इस सत्र में पास होने की उम्मीद बेहद कम है। इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि सरकार को वन नेशन-वन इलेक्शन के लिए संविधान संशोधन की जरूरत पड़ेगी, जो सामान्य बहुमत से नहीं हो सकता।