बस्तर ओलम्पिक में अदम्य साहस की मिसाल बनी व्हील चेयर दौड़

Wheelchair race becomes an example of indomitable courage in Bastar Olympics

बस्तर ओलम्पिक में अदम्य साहस की मिसाल बनी व्हील चेयर दौड़

जगदलपुर। संभाग स्तरीय बस्तर ओलम्पिक के समापन से पूर्व आयोजन स्थल पर एक ऐसा भावनात्मक और प्रेरणादायी क्षण देखने को मिला, जिसने उपस्थित हर व्यक्ति को भीतर तक झकझोर दिया। माओवादी बारूदी सुरंगों की चपेट में आकर अपने पैर गंवा चुके साहसी प्रतिभागियों की विशेष व्हील चेयर दौड़ का आयोजन किया गया, जिसने खेल भावना के साथ-साथ अदम्य साहस और आत्मविश्वास का सशक्त संदेश दिया।

इस व्हील चेयर दौड़ में बीजापुर जिले के छोटे तुमनार निवासी किशन हपका, सुकमा जिले के पुसवाड़ा के माड़वी सुक्का, सुकमा जिले के ही मेड़वाही के मड़कम मुन्ना, बीजापुर जिले की सरस्वती ओयाम तथा करटम जोगक्का ने भाग लिया। सभी प्रतिभागी माओवादियों द्वारा बिछाई गई आईईडी विस्फोटक सुरंगों की चपेट में आकर अपने पैरों से लाचार हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके हौसले और जज्बे में कोई कमी नहीं दिखी। व्हील चेयर पर दौड़ते हुए इन साहसी लोगों ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि शारीरिक अक्षमता उनके सपनों और आत्मविश्वास को रोक नहीं सकती। उन्होंने अपने संघर्ष और जीवटता के माध्यम से यह साबित किया कि माओवादी हिंसा उनके जीवन की गति को थाम नहीं सकी है और वे पूरे आत्मबल के साथ आगे बढ़ने के लिए संकल्पित हैं। दौड़ के दौरान दर्शकों की तालियों और उत्साह ने माहौल को भावुक बना दिया। 

यह आयोजन केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि साहस, उम्मीद और सकारात्मक सोच का प्रतीक बन गया। बस्तर ओलम्पिक के मंच से दिया गया यह संदेश लंबे समय तक लोगों के मन में प्रेरणा के रूप में जीवित रहेगा कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी जीवन के प्रति विश्वास और आगे बढ़ने की इच्छा सबसे बड़ी ताकत होती है।