जो स्थान शरीर में प्राण का होता है, वही स्थान राष्ट्र में विराट का है: चंद्राकर
The place that Prana has in the body, the same place is that of Virat in the nation: Chandrakar
मैनपाट। सांसद-विधायक प्रशिक्षण वर्ग के तृतीय दिवस पर प्रात:कालीन योग सत्र में सम्मिलित होकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय के राष्ट्रहित में किए गए संघर्षों एवं उनके आदर्शों पर भाजपा मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक श्री अजय चंद्राकर ने विचार प्रस्तुत किए। चंद्राकर ने कहा जो स्थान शरीर में प्राण का होता है, वही स्थान राष्ट्र में विराट का है। उपाध्याय जी ने इस विराट की चेतना के लिए अपने सम्पूर्ण जीवन को समर्पित कर दिया।
आज आवश्यकता है कि हम सभी, इस महान संगठन के माध्यम से, राष्ट्र के विराट के लिए अपने जीवन को समर्पित करें। उन्होंने कहा आज जब देश लोकतंत्र के नए युग की ओर अग्रसर है, तब यह आवश्यक हो गया है कि राजनीति राष्ट्र सेवा का प्रतिबिंब बने।
इसी चिंतन को अपने जीवन में उतारने वाले महान राष्ट्रचिंतक पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय राजनीति को एक नई वैचारिक दिशा प्रदान की। उन्होंने राष्ट्र प्रेम, सांस्कृतिक चेतना और सुशासन के लिए “पंच निष्ठा” का सिद्धांत दिया जो आज भी प्रत्येक जनप्रतिनिधि और राजनीतिक संगठन के लिए एक प्रकाश स्तंभ के रूप में खड़ा है।






