हरी खाद और नील-हरित काई से खेती को मिलेगी नई दिशा

Green manure and blue-green algae will give a new direction to agriculture.

हरी खाद और नील-हरित काई से खेती को मिलेगी नई दिशा

रासायनिक खाद पर निर्भरता घटाने की पहल

रायपुर,  अप्रैल 2026

रासायनिक खाद पर निर्भरता घटाने की पहल

खेती की बढ़ती लागत और मृदा की गिरती उर्वरता के बीच मुंगेली जिला प्रशासन ने टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। कलेक्टर के निर्देशन में कृषि विभाग द्वारा किसानों को रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग के साथ-साथ जैविक विकल्प अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

जिले में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के माध्यम से गांव-गांव में शिविर और चौपाल आयोजित किए जा रहे हैं, जहां किसानों को हरी खाद और नील-हरित काई (ब्लू-ग्रीन एल्गी) के उपयोग और लाभों की जानकारी दी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन प्राकृतिक विकल्पों के उपयोग से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है, उत्पादन लागत में कमी आती है तथा मृदा की उर्वरता और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित होती है।

कृषि विभाग के उपसंचालक ने बताया कि किसानों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से बीज निगम, धरमपुरा में नील-हरित काई उत्पादन हेतु आवश्यक संरचना का निर्माण किया जा रहा है। अधिकारियों द्वारा निर्माण प्रक्रिया का अध्ययन करते हुए इसे ग्राम स्तर तक विस्तारित करने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वे स्वयं नील-हरित काई का उत्पादन कर अपने खेतों में इसका उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए विभाग द्वारा “मदर कल्चर” उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक किसान इस तकनीक को अपनाकर लाभान्वित हो सकें।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि हरी खाद और नील-हरित काई के उपयोग से न केवल खेती की लागत में कमी आएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ टिकाऊ कृषि प्रणाली को भी सुदृढ़ किया जा सकेगा।