बायोफ्लॉक तकनीक से समृद्ध हो रहे किसान कैलाश पैकरा
Farmer Kailash Paikra is prospering with biofloc technology
शासन की योजना से मिली 8.40 लाख रुपये की सब्सिडी ने बदली तस्वीर
खेती के साथ-साथ मत्स्य पालन से अतिरिक्त आय
रायपुर, 28 जनवरी 2026

छत्तीसगढ़ शासन की किसान-हितैषी योजनाएं एवं आधुनिक तकनीकों के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और आय में वृद्धि नये अवसर सुलभ हो रहे हैं। सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड अंतर्गत ग्राम माजा निवासी श्री कैलाश पैकरा इसके उदाहरण हैं, जिन्होंने बायोफ्लॉक तकनीक को अपनाकर खेती के साथ-साथ मत्स्य पालन में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
श्री कैलाश पैकरा पारंपरिक रूप से धान की खेती करते थे, किंतु अधिक आय के उद्देश्य से उन्होंने मत्स्य विभाग से संपर्क कर शासन की बायोफ्लॉक योजना का लाभ लिया। इस योजना के अंतर्गत उन्होंने लगभग 14 लाख रुपये की लागत से मत्स्य पालन की शुरूआत की, जिसमें उन्हें 8.40 लाख रुपये का अनुदान मिला। उन्होंने अपने 32×32 डिसमिल क्षेत्र में आधुनिक तालाब एवं बायोफ्लॉक सिस्टम विकसित किया।
बायोफ्लॉक तकनीक में कम पानी और सीमित स्थान में अधिक मत्स्य उत्पादन होता है। वर्तमान में उनके फार्म में लगभग 10 हजार मछलियां हैं, जिनमें करीब 7 हजार तिलपिया के अतिरिक्त रोहू, कतला, मृगल एवं रूपचंद जैसी प्रजातियां शामिल हैं। प्राकृतिक प्रजनन के कारण उत्पादन में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिससे उन्हें वर्षभर नियमित आय प्राप्त हो रही है।
श्री पैकरा ने बताया कि मछलियों के विपणन के लिए उन्हें बाजार जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, व्यापारी स्वयं फार्म पर पहुंचकर मछलियां खरीद लेते हैं। थोक में 150 से 160 रुपये प्रति किलोग्राम तथा फुटकर में 150 से 200 रुपये प्रति किलोग्राम तक मूल्य प्राप्त हो रहा है।
श्री कैलाश पैकरा ने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है। उनकी सफलता से क्षेत्र के अन्य किसान भी आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।






