छत्तीसगढ़ राज्योत्सव पर सूरजपुर में तीन दिवसीय कार्यक्रम में झलकेगी सांस्कृतिक विरासत

Chhattisgarh State Festival: Cultural heritage will be reflected in the three-day program in Surajpur

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव पर सूरजपुर में तीन दिवसीय कार्यक्रम में झलकेगी सांस्कृतिक विरासत

सूरजपुर।  छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के रजत महोत्सव के अवसर पर सूरजपुर जिले में 02 नवंबर से 04 नवंबर तक तीन दिवसीय जिला स्तरीय राज्योत्सव कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन सूरजपुर के बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के समीप स्थित स्टेडियम ग्राउंड में संपन्न होगा, जिसमें छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, कला और परंपरा की मनमोहक झलक देखने को मिलेगी।

राज्योत्सव के इस आयोजन में प्रदेश व सरगुजा संभाग के सुप्रसिद्ध लोक कलाकार एवं लोकप्रिय गायक अपनी प्रस्तुतियों से समूचे जिले को संगीतमय बना देंगे। कार्यक्रम के पहले दिन 02 नवंबर को ’’लव मी इंडिया’’ फेम गायिका स्तुति जायसवाल, 03 नवंबर को ’’हाय रे सरगुजा नाचे’’ फेम गायक संजय सुरीला, और 04 नवंबर को ’’हमर पारा तुहर पारा’’ फेम गायक सुनील मानिकपुरी अपनी शानदार प्रस्तुति देंगे।

कार्यक्रम में लोक कलाकारों के साथ-साथ जिले के शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े विद्यार्थी भी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। जिले के 57 शैक्षणिक संस्थानों जिनमें एनसीसी कैडेट्स, स्काउट-गाइड, स्वामी आत्मानंद विद्यालय, एकलव्य विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय, छात्रावास, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, नर्सिंग कॉलेज सहित शासकीय व अशासकीय स्कूलों के छात्र-छात्राएं शामिल हैं, वे पारंपरिक नृत्य एवं लोकनृत्य प्रस्तुतियों से राज्योत्सव अपनी छंटा बिखेरेंगे।

इस अवसर पर जिला स्तरीय कार्यक्रम की मुख्य अतिथि महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े होगीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में जिले के प्रभारी एवं खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, सहित रामसेवक पैकरा, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम, चिन्तामणि महाराज, सांसद सरगुजा, भूलन सिंह मराबी, विधायक प्रेमनगर, शकुंतला पोर्ते, विधायक प्रतापपुर, चन्द्रमणी पैकरा, अध्यक्ष जिला पंचायत सूरजपुर; एवं जिले की नगरीय निकायों व जनपद पंचायतों के अध्यक्षगण भी शामिल होंगे।

सूरजपुर कलेक्टर एस. जयवर्धन ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे छत्तीसगढ़ राज्य के रजत महोत्सव पर आयोजित तीन दिवसीय राज्योत्सव कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर छत्तीसगढ़ी संस्कृति, लोककला और परंपराओं का आनंद लें। उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी है।