नवा रायपुर में महिलाएं दौड़ा रही पिंक ई-रिक्शा
Women are driving pink e-rickshaws in Nava Raipur
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण कदम
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ रोजगार के अवसर भी तैयार कर रही है। उसी दिशा में एक कदम नवा रायपुर में भी महिलाओं को पिंक ई-रिक्शा सौंपकर उनकी तरक्की की राहें आसान कर दी है।
नवा रायपुर के विकास में अब महिलाएं भी सहभागिता निभाएगी। यहां रेलवे स्टेशन खुलने के बाद से विकास के द्वार भी खुल गए है। व्यापारिक गतिविधियां भी तेजी के साथ संचालित होगी। इसके लिए महिलाओं को पिंक ई-रिक्शा सौंपा गया है। नवा रायपुर में अब एयरपोर्ट से सीबीडी रेलवे स्टेशन या जंगल सफारी, मंत्रालय, पुरखौती मुक्तांगन, शासकीय विभागों के दफ्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम जाना बेहद आसान हो गया है। एनआरडीए ने ग्रामीण महिलाओं के हाथों में पिंक ई-रिक्शा की चाबी सौंपी है। इससे महिलाओं को स्वरोजगार के साथ आर्थिक तरक्की भी आसान हो जाएगी।
छोटी दूरी के लिए आसान हुई राहें
नवा रायपुर में शानदार सड़कें निर्माण की गई हैं, लेकिन छोटी दूरियों और प्रमुख स्थानों तक आवाजाही में नागरिकों को पहले दिक्कतें होती थी। पहले बस के बाद आवाजाही के सुगम साधन नहीं थी, लेकिन अब सुगम साधन बन चुके है। पिंक ई-रिक्शा काफी मददगार साबित होगा।
बिहान की दीदियों के हाथों में सौंपी गई कमान
बिहान छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत अभनपुर और आरंग ब्लॉक के गांवों तूता, केंद्री, निमोरा, कुर्रू, चेरिया और बेंद्री की 40 महिलाओं को 40 इलेक्ट्रिक ऑटो मुफ्त में सौंपे गए हैं। यह पहल न केवल नया रायपुर में यात्रा को सुगम बनाएगी, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता भी देगी। इनका ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म रेपिडो से टाई-अप किया गया है, जिससे यात्री मोबाइल ऐप से ऑटो बुक कर सकते हैं। सेवा की दरें भी किफायती हैं और ऑटो पूरी तरह इलेक्ट्रिक हैं, जिससे पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भी निभाई जा रही है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया शुभारंभ
इस योजना का उद्घाटन 11 अप्रैल 2025 को राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा किया गया। उनके साथ वित्त एवं आवास मंत्री ओपी चौधरी भी उपस्थित हुए। उन्होंने इसे महिला सशक्तिकरण और स्मार्ट सिटी के समावेशी विकास की दिशा में एक अहम पहल बताया।
दीदियों की आवाजः रोजगार आत्मविश्वास और सम्मान
बेंद्री गांव की निवासी रेशमा साहू कहती है कि अब नया रायपुर में ऑटो चलाने और अपने घर की आर्थिक जिम्मेदारी संभाल रही हैं। पहले घर में कोई आमदनी नहीं थी, अब रोजाना सवारी मिल जाती है तथा प्रतिदिन 500 से 600 की कमाई कर रही हैं। हम खुद बुकिंग ले सकते हैं, शहर के अंदर कई जगह जाती हूं। गर्व होता है जब लोग कहते हैं कि दीदी आप अच्छा चला रही हैं।
कभी सोचा नहीं था, लेकिन सपना साकार
केंद्री की मीना वर्मा कहती है कि हमने सोचा नहीं था कि कभी गाड़ी चला पाएंगे। अब हम खुद अपनी गाड़ी चला रहे हैंए ऑनलाइन बुकिंग भी करते हैं। अब गांव की बेटियां भी प्रेरणा ले रही हैं।






