एकल माताओं का जीवन संघर्ष, जिम्मेदारियों और आत्मबल का प्रतीक : प्रीति दास मिश्रा

The life of single mothers is a symbol of struggle, responsibilities and self-confidence: Preeti Das Mishra

एकल माताओं का जीवन संघर्ष, जिम्मेदारियों और आत्मबल का प्रतीक : प्रीति दास मिश्रा

रायपुर। प्रत्युषा फाउंडेशन रायपुर द्वारा 16 मई 2026 को मैग्नेटो मॉल स्थित संतोष हॉल में “एकल माँ प्रसूति सम्मान एवं शपथ ग्रहण समारोह” का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य उन महिलाओं के संघर्ष, साहस और आत्मनिर्भरता को सम्मान देना था, जिन्होंने जीवनसाथी के निधन के बाद अकेले अपने बच्चों का पालन-पोषण करते हुए समाज में मिसाल कायम की।

कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद अदिति दास गुप्ता ने भगवान जगन्नाथ जी के मंगलाचरण पर भरतनाट्यम की मनमोहक प्रस्तुति दी। अतिथियों का स्वागत पौधे भेंट कर किया गया।

संस्था की संस्थापिका प्रीति दास मिश्रा ने कहा कि एकल माताओं का जीवन संघर्ष, जिम्मेदारियों और आत्मबल का प्रतीक होता है। उन्होंने बताया कि संस्था पिछले कई वर्षों से ऐसी माताओं को सम्मानित कर उनके साहस को समाज के सामने लाने का कार्य कर रही है।

समारोह का सबसे भावुक पल तब आया जब एक दिव्यांग माँ को सम्मानित किया गया। उनके संघर्ष और हौसले की कहानी सुनकर पूरा सभागार तालियों की गूंज से भर उठा।

कार्यक्रम में संस्था के नए पदाधिकारियों और सदस्यों को भी दायित्व की शपथ दिलाई गई। वर्ल्ड ब्राह्मण फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद ओझा ने शपथ अधिकारी के रूप में सभी पदाधिकारियों को विधिवत शपथ दिलाई।

इस अवसर पर 25 एकल माताओं को सम्मानित किया गया, जिनमें डॉ. आरती साठे, अनुराधा श्रीवास्तव, अम्बेश्वरी राठौर, पुष्पा दुबे, ममता जोशी, रेखा वर्मा, कंचन पंजवानी, वीणा राव, आशा देवी और माधुरी शुक्ला सहित कई नाम शामिल रहे।

कार्यक्रम में अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा, प्रोफेसर डॉ. रश्मि चावरे, डॉ. प्रीति सतपति, सुरेश मिश्रा, डॉ. सुनील ओझा, एस केयर हॉस्पिटल की सीईओ सीमा कटंकर समेत कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।

कार्यक्रम का संचालन शशि यादव ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन गुणानिधि मिश्रा ने प्रस्तुत किया।