विकलांगता नहीं बनी बाधाः हीरामोती नाग बनीं ‘लखपति दीदी’, आत्मनिर्भरता की मिसाल
Disability no longer a barrier: Hiramoti Nag becomes 'Lakhpati Didi', an example of self-reliance
रायगढ़, मार्च 2026
दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत के बल पर इंसान हर चुनौती को पार कर सकता है। इसका प्रेरक उदाहरण हैं विकासखण्ड धरमजयगढ़ के ग्राम बांझीआमा, ग्राम पंचायत समनिया की निवासी हीरामोती नाग। बचपन में पोलियो होने के कारण वे पैरों से दिव्यांग हैं, लेकिन उन्होंने कभी अपनी परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। आज वे स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बन गई हैं और ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में पहुंचकर अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं।
हीरामोती नाग श्री महिला स्व-सहायता समूह, बांझीआमा से जुड़ी हुई हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आजीविका के नए अवसर मिले। समूह के माध्यम से उन्हें सामुदायिक निवेश निधि से 20 हजार रुपये तथा बैंक से 50 हजार रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इस राशि का उपयोग उन्होंने अपने स्वरोजगार को शुरू करने में किया। हीरामोती नाग ने इस सहायता से सिलाई मशीन खरीदकर सिलाई कार्य शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने गांव की महिलाओं और बच्चों के कपड़े सिलने का काम शुरू किया। उनके काम की गुणवत्ता और मेहनत के कारण गांव में उनकी अच्छी पहचान बनने लगी और आय में भी लगातार वृद्धि होने लगी।
आज हीरामोती नाग अपने सिलाई कार्य से नियमित आय अर्जित कर रही हैं। उनकी मेहनत और लगन के परिणामस्वरूप वे ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं। अपनी आय से वे न केवल अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर रही हैं, बल्कि आत्म सम्मान के साथ जीवन भी जी रही हैं। हीरामोती नाग की सफलता यह साबित करती है कि यदि अवसर और संकल्प दोनों साथ हों, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। उनकी यह प्रेरणादायक यात्रा आज गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वावलंबी बनने के लिए प्रेरित कर रही है।






