श्री रामलला दर्शन योजना” के तहत मनेंद्रगढ़ से श्रद्धालुओं का दल अयोध्या रवाना

A group of devotees from Manendragarh left for Ayodhya under the "Shri Ram Lalla Darshan Yojana".

श्री रामलला दर्शन योजना” के तहत मनेंद्रगढ़ से श्रद्धालुओं का दल अयोध्या रवाना

49 श्रद्धालु विशेष रेल से करेंगे अयोध्या धाम की यात्रा, 21 से 24 अप्रैल तक रहेगा प्रवास

एमसीबी/21 अप्रैल 2026 छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी “श्री रामलला दर्शन (अयोध्या धाम) योजना” के अंतर्गत मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले से चयनित श्रद्धालुओं का दल आज असीम उत्साह एवं श्रद्धा के साथ अयोध्या धाम के लिए रवाना हुआ। शासन की इस जनकल्याणकारी योजना के माध्यम से आम नागरिकों को भगवान श्रीराम के जन्मस्थल के दर्शन का अवसर प्रदान किया जा रहा है।
जिले के नगरीय निकायों एवं जनपद पंचायतों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर कुल 57 श्रद्धालुओं की सूची तैयार कर छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड को प्रेषित की गई थी, जिनमें से 49 श्रद्धालु यात्रा के लिए रवाना हुए। जिला मुख्यालय मनेंद्रगढ़ से श्रद्धालुओं का दल बस द्वारा अंबिकापुर के लिए प्रस्थान किया, जहां से वे विशेष रेल के माध्यम से अयोध्या धाम पहुंचेंगे। 21 से 24 अप्रैल 2026 तक प्रस्तावित इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के ठहरने, भोजन, दर्शन, सुरक्षा एवं चिकित्सकीय सुविधाओं की समुचित व्यवस्था शासन एवं जिला प्रशासन द्वारा सुनिश्चित की गई है। साथ ही यात्रा दल के साथ एक एस्कॉर्ट अधिकारी की भी तैनाती की गई है, जो पूरी यात्रा के दौरान व्यवस्थाओं का सतत पर्यवेक्षण करेंगे।
श्रद्धालुओं में उत्साह, भक्ति का माहौल
अयोध्या के लिए रवाना होते समय श्रद्धालुओं के चेहरों पर उत्साह एवं भक्ति भाव स्पष्ट रूप से झलक रहा था। श्रद्धालुओं ने इस अवसर के लिए शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह यात्रा उनके जीवन का एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव सिद्ध होगी। राम धुन, भजन एवं जयघोषों के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ाव का प्रयास
“श्री रामलला दर्शन योजना” का उद्देश्य नागरिकों को केवल धार्मिक यात्रा कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ना भी है। अयोध्या धाम में श्रीरामलला के दर्शन श्रद्धालुओं के जीवन में नई ऊर्जा एवं सकारात्मकता का संचार करेंगे। यह योजना राज्य में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर रही है।