बिजली खरीदी के टैरिफ में पांच साल में अंतर निकला 15 सौ करोड़
The difference in the tariff of electricity purchase in five years turned out to be Rs 1500 crore
रायपुर। हर माह ऊर्जा प्रभार पर जो फार्मूला फ्यूल पॉवर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (एफपीपीएएस) का शुल्क तय होता है, अक्टूबर से इसको दो हिस्सों में लिया जा रहा है।
एक हिस्सा तो नियमित है, लेकिन दूसरा हिस्सा एनटीपीसी लारा के टैरिफ के अंतर का है। केंद्रीय बिजली नियामक आयोग ने लारा का 2019 से अब तक का जो टैरिफ तय किया है, उसके कारण छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी ने लारा से जो अब तक बिजली खरीदी है, उसमें 15 सौ करोड़ का अंतर आया है। अब इसको छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी को छह किस्तों में देना है, इसलिए उपभोक्ताओं से इसकी वसूली छह किस्तों में छह माह तक होगी। इसका प्रारंभ अक्टूबर से हो चुका है।
छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी प्रदेश के उपभोक्ताओं को जो बिजली उपलब्ध कराती है, वह बिजली उसके अपने संयंत्रों के साथ ही एनटीपीसी और अन्य संयंत्रों से ली जाती है।
इसकी खरीदी पॉवर कंपनी करती है और इसका भुगतान किया जाता है। बिजली की उत्पादन लागत भी हर माह कम ज्यादा होने के कारण इसको टैरिफ में न जोड़कर इसके लिए एफपीपीएएस के माध्यम से इसका शुल्क उपभक्ताओं से अलग से लिया जाता है।
पहले यह शुल्क वीसीए के रूप में लिया जाता था, लेकिन पिछले साल से इसको एफपीपीएस के माध्यम से लिया जाता है।
अचानक आया बकाया का मैसेज
प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को दिसंबर का बिल जमा करने के बाद भी अचानक नए साल में बकाया होने का मैसेज आया। किसी उपभोक्ता का 70 रुपए तो किसी का 130 रुपए, किसी का 170 रुपए तो किसी का दो सौ रुपए और कई का इससे ज्यादा भी बकाया होने का मैसेज आया। इसके बारे में पॉवर कंपनियों के अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने बताया दरअसल यह लारा के टैरिफ के अंतर की नवंबर में ली जाने वाली राशि है। कंपनी के अधिकारियों ने इसको पहले की तरह ही बिल में लेने की बात कही है और कहा है कि इसको अभी जमा करने की जरूरत नहीं है।






