हाथों में खाद की खाली बोरियां लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायकों ने किया प्रदर्शन

Congress MLAs protested in Madhya Pradesh assembly with empty fertilizer sacks in their hands

हाथों में खाद की खाली बोरियां लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायकों ने किया प्रदर्शन

भोपाल। भाजपा सरकार की वादाखिलाफी, भ्रष्टाचार, अनुसूचित जाति-जनजाति, महिलाओं, बच्चियों के उत्पीड़न, किसानों की समस्या, बेरोजगारी सहित अन्य मुद्दों को लेकर कांग्रेस विधानसभा का घेराव कर शक्ति प्रदर्शन करने सड़क पर उतर गई है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में हो रहे इस आंदोलन में प्रदेशभर से कार्यकर्ता भाग ले रहे हैं। सभी भोपाल के जवाहर चौक पर एकत्र हुए इसके बाद हाथ में खाद की बोरियां लेकर आगे बढ़े।

इधर खाद की खाली बोरियां लेकर कांग्रेस विधायक विधानसभा में पहुंचे। यहां उन्होंने गांधी प्रतिमा के सामने जमकर नारेबाजी की। सचिन यादव ने कहा कि प्रदेश का किसान खाद नहीं मिलने की वजह से परेशान है। 12 साल पहले जो सोयाबीन के दाम थे आज भी वही मिल रहे हैं। एक तो खाद नहीं मिल रहा, दूसरा ब्लैक में नकली खाद बेचा जा रहा है।

शून्यकाल में मुद्दा उठाया गया

खाद की कमी को लेकर कांग्रेस ने शून्यकाल में भी मुद्दा उठाया । नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार किसानों को खाता को उपलब्ध नहीं कर पा रही है। बोवानी नहीं हो रही है। किसान परेशान हैं। जगह-जगह लाइन लग रही है, लेकिन सरकार चुप्पी साधे हुए है। वो यह तक नहीं बता रही है कि खाद कब तक मिलेगी। सरकार की ओर से इस विषय पर जब कोई जवाब नहीं दिया गया तो फिर कांग्रेस के विधायकों ने बहिर्गमन कर दिया।

सुरक्षा के तगड़े प्रबंध

कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए बैरिकेडिंग के साथ सुरक्षा के तगड़े प्रबंध किए गए हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पटवारी ने बताया कि प्रदेशभर से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता आंदोलन में भाग लेने के लिए पहुंचे हैं। भाजपा सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल में प्रदेशवासियों को केवल धोखा मिला है।

लाड़ली बहनों को तीन हजार रुपये नहीं मिल रहे

न तो लाड़ली बहनों को तीन हजार रुपये देने की पहल की गई, न ही किसानों को धान के 3,100 और गेहूं के 2,700 रुपये प्रति क्विंटल दिए गए। सोयाबीन का छह हजार रुपये देने की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महाराष्ट्र चुनाव के समय की थी, उसे भी लागू नहीं किया गया।