अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस पर हर्बल सेक्टर की भूमिका पर संगोष्ठी आयोजित
Seminar organized on the role of herbal sector on International Forest Day
रायपुर, 22 मार्च 2026


अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा “2047 के विकसित छत्तीसगढ़ लक्ष्य को पूरा करने में हर्बल सेक्टर की भूमिका” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम बोर्ड कार्यालय के सभागार, राज्य वन अनुसंधान परिसर , जीरो पॉइंट,रायपुर में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम में बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जे.ए.सी.एस. राव ने उपस्थित प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य शासन की योजनाओं का लाभ लेकर औषधीय पौधों की खेती अपनाई जा सकती है, जिससे आय में वृद्धि के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने युवाओं एवं आम नागरिकों से हर्बल सेक्टर में आगे आकर “विकसित छत्तीसगढ़-2047” के लक्ष्य की प्राप्ति में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया ।
संगोष्ठी में विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं, हर्बल सेक्टर में स्टार्टअप शुरू करने के इच्छुक युवाओं एवं गणमान्य नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान बोर्ड द्वारा संचालित योजनाओं एवं गतिविधियों की जानकारी प्रस्तुत की गई तथा संबंधित वीडियो का प्रदर्शन किया गया। पावर पाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से औषधीय पौधों के संरक्षण, औषधि पौधा संरक्षित क्षेत्रों की अवधारणा तथा टिश्यू कल्चर तकनीक से पौधों के संवर्धन की जानकारी दी गई। इसके साथ ही विभिन्न औषधीय एवं सुगंधित पौधों की वैज्ञानिक खेती के तरीकों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया। संगोष्ठी में पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय, स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. कमलेश कुमार शुक्ला ने औषधीय पौधों में पाए जाने वाले सूक्ष्मजीवों (माइक्रोब्स) की भूमिका एवं उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में उपयोगिता पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।






