अबूझमाड़ पीस मैराथन 2026: शांति, विश्वास और विकास की नई पहचान : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय 31 जनवरी को नारायणपुर में होंगे शामिल   

Abujhmad Peace Marathon 2026: A new identity of peace, trust and development: Chief Minister Shri Vishnu Dev Sai will participate in it on January 31 in Narayanpur

अबूझमाड़ पीस मैराथन 2026: शांति, विश्वास और विकास की नई पहचान : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय 31 जनवरी को नारायणपुर में होंगे शामिल   

रायपुर 29 जनवरी 2026
कभी देश के सबसे दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में गिने जाने वाला अबूझमाड़ आज शांति, विश्वास और विकास की नई राह पर अग्रसर है। दशकों तक माओवादी हिंसा और भय के साये में रहे इस क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इन्हीं प्रयासों का सशक्त प्रतीक बनकर अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन 2026 सामने आई है।
नारायणपुर से बासिंग तक आयोजित 21 किलोमीटर की यह हाफ मैराथन केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि शांति, एकता और सौहार्द का संदेश देने वाला अभियान है। इस आयोजन के माध्यम से उन क्षेत्रों तक सकारात्मक संदेश पहुंच रहा है, जो लंबे समय तक विकास और सरकारी योजनाओं से वंचित रहे। अबूझमाड़िया जनजाति सहित स्थानीय समुदाय की भागीदारी इस आयोजन को विशेष रूप से प्रभावी बना रही है।
31 जनवरी की सुबह माननीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ स्वयं अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन में शामिल होंगे। कार्यक्रम की शुरुआत जुंबा गतिविधि से होगी, जिसके पश्चात प्रातः 6.30 बजे मुख्यमंत्री द्वारा मैराथन को फ्लैग-ऑफ किया जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री रामकृष्ण आश्रम पहुंचकर आश्रम के बच्चों के साथ नाश्ता करेंगे। मुख्यमंत्री की उपस्थिति से यह संदेश और सशक्त होगा कि राज्य सरकार अबूझमाड़ के सर्वांगीण विकास और शांति स्थापना के लिए प्रतिबद्ध है।
अबूझमाड़ पीस मैराथन 2026 को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सहभागिता मिली है। इस आयोजन में 6500 से अधिक धावकों ने पंजीयन कराया है, जिनमें 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय धावक, अन्य राज्यों से 500 से अधिक, छत्तीसगढ़ राज्य से लगभग 6000, तथा नारायणपुर जिले से 4000 से अधिक धावक शामिल हैं। इसके साथ ही क्वाड रन में 12 धावकों ने भी भागीदारी की है।
यह मैराथन न केवल युवाओं को खेल और फिटनेस से जोड़ रही है, बल्कि पर्यटन को बढ़ावा देने, स्थानीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शांति व विकास के नए युग की शुरुआत का प्रतीक बन रही है।