स्व-सहायता समूह से बदली जिंदगी, डेयरी और खेती से ‘लखपति दीदी’ बनीं माधुरी जंघेल

Self-help groups changed her life, and Madhuri Janghel became a 'Lakhpati Didi' through dairy farming and farming.

स्व-सहायता समूह से बदली जिंदगी, डेयरी और खेती से ‘लखपति दीदी’ बनीं माधुरी जंघेल

डेयरी, पशु आहार और खेती से सालाना 5.50 लाख की आय

बड़े स्तर पर डेयरी और प्लाई ऐश ईंट निर्माण की भविष्य योजना

रायपुर 17 मार्च  2026

 माधुरी जंघेलखैरागढ़ छुईखदान, गंडई जिले के ग्राम पंचायत संडी, विकासखंड छुईखदान की निवासी श्रीमती माधुरी जंघेल आज स्व-सहायता समूह की बदौलत एक सफल महिला उद्यमी के रूप में पहचान बना चुकी हैं। पतंजली महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने डेयरी, कृषि और पशु आहार व्यवसाय के माध्यम से अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है और आज उनकी सालाना आय लगभग 5.50 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

श्रीमती माधुरी जंघेल वर्ष 2017 में पतंजली महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने से पहले वह केवल पारंपरिक कृषि कार्य करती थीं और सीमित आय के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। बच्चों की शिक्षा और परिवार की जरूरतों को पूरा करना भी कठिन था। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बैंक लिंकेज और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कुल 9.50 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ, जिससे उन्होंने अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने की शुरुआत की।

समूह से प्रेरणा लेकर माधुरी जंघेल ने सबसे पहले 50 हजार रुपये की सहायता से पशुपालन विभाग के सहयोग से गाय पालन शुरू किया। शुरुआत में एक गाय से डेयरी व्यवसाय प्रारंभ किया, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर आज पांच गायों तक पहुंचा दिया है। वर्तमान में उनके यहां से प्रतिदिन लगभग 40 लीटर दूध का उत्पादन होता है। वह दूध को देवभोग द्वारा संचालित मां बम्लेश्वरी महिला दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति, संडी में 35 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचती हैं। समिति से बोनस और पशु आहार के रूप में लगभग 10 रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त लाभ भी मिलता है। इस प्रकार दूध व्यवसाय से उन्हें औसतन प्रतिमाह लगभग 12 हजार रुपये और सालाना करीब 1.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है।

डेयरी के साथ-साथ माधुरी जंघेल ने पशु आहार का व्यवसाय भी शुरू किया है। वह राजनांदगांव से थोक दर पर पशु आहार खरीदकर गांव के पशुपालकों को उपलब्ध कराती हैं, जिससे उन्हें सालाना लगभग 50 हजार रुपये की अतिरिक्त आय होती है। इसके अलावा उनके पास 4.5 एकड़ कृषि भूमि है, जिस पर वह हर साल दो फसल लेती हैं और इससे लगभग 3.50 लाख रुपये की आय अर्जित करती हैं। डेयरी, कृषि और पशु आहार व्यवसाय से उन्हें कुल मिलाकर करीब 5.50 लाख रुपये वार्षिक आय हो रही है।

आर्थिक स्थिति मजबूत होने के बाद माधुरी जंघेल अब अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा और पोषण पर विशेष ध्यान दे रही हैं। उन्होंने अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए पतंजली संस्थान हरिद्वार भेजा है, जहां उनकी पढ़ाई पर प्रतिवर्ष लगभग 3 लाख रुपये खर्च कर रही हैं। इससे उनके परिवार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में भी तेजी से सुधार हुआ है।

भविष्य की योजना के बारे में माधुरी जंघेल बताती हैं कि वह आगे और अधिक गाय खरीदकर बड़े स्तर पर डेयरी व्यवसाय को विकसित करना चाहती हैं। इसके साथ ही प्लाई ऐश ईंट निर्माण का कार्य भी शुरू करने की योजना बना रही हैं, जिससे आय में और वृद्धि हो सके तथा गांव की अन्य महिलाओं को भी रोजगार के अवसर मिल सकें।

आज श्रीमती माधुरी जंघेल की सफलता गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। स्व-सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज की तस्वीर बदल सकती हैं।