उद्यानिकी की आधुनिक तकनीकों से किसान महेश कश्यप की बदली तकदीर
Modern horticulture techniques changed the fortunes of farmer Mahesh Kashyap.
रायपुर, 12 मई 2026

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के बिल्हा विकासखंड अंतर्गत कछार निवासी श्री महेश कश्यप आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा के स्रोत बन गए हैं। कभी पारंपरिक खेती के कारण बढ़ती लागत और घटते लाभ से परेशान रहने वाले महेश ने उद्यानिकी विभाग की सहायता से आधुनिक कृषि को अपनाया और अपनी आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी सुधार किया।
परंपरागत खेती से आधुनिकता का सफर
श्री कश्यप पहले परंपरागत फसलों पर निर्भर थे, लेकिन उद्यानिकी विभाग की समेकित उद्यानिकी विकास योजना ने उनकी सोच और खेती का तरीका बदल दिया। विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने 2.00 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण और फेंसिंग के लिए प्राप्त अनुदान का लाभ उठाकर सब्जी उत्पादन का उन्नत मॉडल तैयार किया।
तकनीक का बेजोड़ तालमेल
श्री कश्यप ने अपने खेतों में वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग करते हुए तकनीकों को अपनाया। ड्रिप सिंचाई से न केवल पानी की बचत हुई, बल्कि फसल को सटीक पोषण मिला और खरपतवार की समस्या भी कम हुई। मिट्टी में नमी बनाए रखने और मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए मल्चिंग का प्रभावी उपयोग किया गया। वर्मी कंपोस्ट, जैविक खाद के प्रयोग से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता बढ़ी है।
आय में दोगुनी वृद्धि और रिकॉर्ड उत्पादन
महेश ने बैंगन के साथ-साथ अंतरवर्ती फसल के रूप में कद्दू और अन्य मौसमी सब्जियों की खेती की। लगभग 4.5 एकड़ में बैगन कीखेती की है। उन्होंने बताया कि अनुमानित 900 से 1100 क्विंटल उत्पादन होने की संभावना है, जहाँ खेती में लगभग 7 से 8 लाख रुपये की लागत आई, वहीं सब्जियों की बिक्री से उन्हें 14 से 15 लाख रुपये की शुद्ध आर्थिक लाभ प्राप्त हुई।
क्षेत्र के किसानों के लिए रोल मॉडल
महेश कश्यप आज न केवल आत्मनिर्भर हुए हैं, बल्कि वे किसानों को संदेश दे रहे हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर कृषि को एक लाभप्रद व्यवसाय बनाया जा सकता है। उद्यानिकी विभाग की यह पहल बिलासपुर के ग्रामीण अंचल में समृद्धि का नया अध्याय लिख रही है।






