डोनाल्ड ट्रंप की इस प्रचंड जीत से दुनिया की सेहत पर क्या बड़ा फर्क पड़ने वाला है?

What big difference is this landslide victory of Donald Trump going to make to the health of the world?

डोनाल्ड ट्रंप की इस प्रचंड जीत से दुनिया की सेहत पर क्या बड़ा फर्क पड़ने वाला है?

अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव जीत कर डोनाल्ड ट्रंप ने वो कर दिखाया है जो इससे पहले कोई अमेरिकी नेता नहीं कर सका था। ट्रंप चार साल व्हाइट हाउस से बाहर रहे। तमाम मुकदमे झेले, कोर्टों के चक्कर लगाये, चुनाव प्रचार के दौरान खुद पर गोली झेली। हम आपको याद दिला दें कि चुनाव प्रचार की शुरुआत में जानलेवा हमले में ट्रंप बाल-बाल बचे थे। उस समय गोली उनके कान को छूकर निकल गयी थी लेकिन अमेरिका को महान बनाने का संकल्प लेकर ट्रंप ने लोगों का समर्थन मांगा और उन्हें भरपूर समर्थन मिल भी गया। ट्रंप पिछला चुनाव करीबी मुकाबले में हार गये थे लेकिन इस बार उन्होंने अच्छे अंतर से चुनाव जीत कर साबित कर दिया है कि जनता का विश्वास उनके साथ है। ट्रंप के रहते आतंकवादी और उनके आका अपने बिल से बाहर निकलने का साहस नहीं जुटा पाते थे लेकिन पिछले चार सालों में दुनिया में आतंक बढ़ा और अमेरिका के समक्ष भी तमाम नई चुनौतियां खड़ी हुईं। उम्मीद है कि अब ट्रंप के कड़े रुख के चलते आतंकियों, उनके मददगारों और अमेरिकी जनता से पैसे ऐंठ रहे देशों की मौज-मस्ती खत्म होने होगी।

इस चुनाव की खास बात यह भी रही कि अमेरिका में भी चुनाव सर्वेक्षण विफल साबित हुए हैं। पहले सबने अनुमान लगाया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में बहुत कांटे की टक्कर रहने वाली है और इस बार का चुनाव अमेरिकी इतिहास में सबसे करीबी मुकाबले के रूप में देखा जायेगा। लेकिन ट्रंप की निर्णायक जीत ने सारे चुनाव पूर्व अनुमानों को गलत साबित कर दिया है। इसके अलावा, कमला हैरिस को जिस तगड़े चुनाव प्रचार के बावजूद करारी हार झेलनी पड़ी उससे यह अनुमान भी सहज ही लगाया जा सकता है कि यदि ट्रंप के मुकाबले जो बाइडन मैदान में उतरे होते तो उन्हें कितनी तगड़ी हार झेलनी पड़ती।

दुनिया के लिए क्या होंगे ट्रंप की जीत के मायने, अगर इस पर बात करें तो आपको बता दें कि अब मध्य-पूर्व में जारी जंग और यूक्रेन-रूस युद्ध खत्म होने के आसार बढ़ सकते हैं क्योंकि ट्रंप ने जीत के बाद भी कहा है कि वह युद्ध नहीं चाहते। इसके अलावा, विदेश से सभी सामानों के आयात पर 20 प्रतिशत सार्वभौमिक शुल्क लगाने की ट्रंप की योजना है। ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान चेतावनी दी थी कि चीन पर 60 प्रतिशत से लेकर 200 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जा सकता है। हालांकि यह इससे ज्यादा भी हो सकता है। इन कदमों से मुद्रास्फीति बढ़ने और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचने की आशंका है। साथ ही ऐसे कदमों से प्रतिशोध, व्यापार युद्ध और वैश्विक अर्थव्यवस्था तहस-नहस होने का भी अंदेशा है।

इसके अलावा, अब यह भी देखना होगा कि मित्र देशों को शत्रु देशों से बचाने की अमेरिकी प्रतिबद्धता का क्या होता है। हम आपको बता दें कि उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) का सदस्य होने के नाते इसके अन्य सदस्यों की मदद के लिए आगे आना अमेरिका का दायित्व है। नाटो के अनुच्छेद पांच के अनुसार यदि कोई देश किसी नाटो सदस्य पर हमला करता है तो वह सभी सदस्यों पर हमला माना जाता है। अमेरिका ने जापान और दक्षिण कोरिया के साथ भी ऐसी ही संधियां कर रखी हैं। अमेरिका के नेतृत्व में नाटो ने रूस से जारी युद्ध में यूक्रेन को सैन्य और आर्थिक सहायता प्रदान की है। इसके विपरीत ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह यूक्रेन को दी जा रही मदद रोक देंगे और कीव पर दबाव बनाएंगे कि वह रूस की शर्तों के अनुसार शांति प्रक्रिया अपनाए। ट्रंप बड़े-बड़े संगठनों को ताकत व प्रभाव दिखाने के मंच के रूप में देखने की बजाय खतरे की वजह और बोझ मानते हैं। हम आपको याद दिला दें कि अपने पिछले कार्यकाल में ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से अमेरिका को बाहर कर लिया था।