मधुमक्खी पालन से स्व-सहायता समूह की आय में वृद्धि

Beekeeping increases the income of self-help groups

मधुमक्खी पालन से स्व-सहायता समूह की आय में वृद्धि

रायपुर, 15 फरवरी 2026

मधुमक्खी पालन से स्व-सहायता समूह की आय में वृद्धि

मधुमक्खी पालन पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ कम लागत में अधिक आय देने वाला प्रभावी स्वरोजगार माध्यम सिद्ध हो रहा है। बगीचा विकासखंड के ग्राम चम्पा में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उल्लेखनीय पहल की गई है। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना अंतर्गत के तहत स्व सहायता समूह का गठन कर महिलाओं को मधुमक्खी पालन के लिए प्रेरित एवं प्रशिक्षित किया गया।

समूह की महिलाओं को मधुमक्खी पालन हेतु 5 बक्से निःशुल्क उपलब्ध कराए गए। वर्तमान में रबी सीजन के दौरान सरसों की फसल के समीप बक्से स्थापित कर वैज्ञानिक पद्धति से पालन किया जा रहा है, जिससे बेहतर उत्पादन की संभावना है। समूह द्वारा एक माह में 5 बक्सों से लगभग 10 किलोग्राम शहद का उत्पादन किया गया, जिसे स्थानीय बाजार में 500 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से विक्रय कर आय अर्जित की गई। इससे समूह की महिलाओं में उत्साह एवं आत्मविश्वास का संचार हुआ है। मधुमक्खियां परागण के माध्यम से जैव विविधता को बढ़ावा देती हैं तथा फसलों की उत्पादकता में वृद्धि करती हैं।